केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल का नाम बदल कर बांग्ला करने के लिये संविधान संशोधन करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पश्चिम बंगाल का नाम बदलने से जुड़े सवाल के जवाब में कहा, “किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिये संविधान में संशोधन करने की जरूरत होती है। फिलहाल इस मामले में संविधान संशोधन का कोई प्रस्ताव नहीं है।”
तृणमूल कांग्रेस के अहमद हसन ने पूछा था कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बांग्ला करने का प्रस्ताव कई बार राज्य की विधानसभा से सर्वानुमति से पारित कर केन्द्र के पास भेजा जा चुका है लेकिन केन्द्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी क्यों नहीं दे रही है।
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राय ने बताया कि किसी भी शहर या किसी स्थान का नाम बदलने के लिये स्थापित प्रक्रिया है। इसमें प्रस्तावित नाम से कोई अन्य मिलता जुलता नाम होने सहित अन्य मानकों का पालन किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का नाम बदलने के लिये संविधान संशोधन करने की बाध्यता होती है।
पश्चिम बंगाल का नाम बांग्ला करने के प्रस्ताव के बारे में राय ने जिक्र किया कि प्रस्तावित नाम से मिलता जुलता नाम पड़ोसी देश बांग्लादेश का है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 26 जुलाई को पश्चिम बंगाल विधानसभा ने तीन प्रचलित भाषाओं बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी में राज्य का नाम बदलकर बांग्ला करने का प्रस्ताव सर्वानुमति से पारित कर केन्द्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष भेजा था।
इस दौरान दिल्ली को अंग्रेजी में देलही के बजाय दिल्ली करने से जुड़े भाजपा सदस्य विजय गोयल के पूरक प्रश्न के जवाब में राय ने कहा कि इस तरह कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष आने पर ही इस पर विचार किया जा सकेगा।


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