लखनऊ, 12 मई (आईएएनएस)। प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों, हस्तशिल्प, बुनकरी और सूक्ष्म उद्यमों को नई मजबूती देने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयासरत है। सरकार की मंशा है कि ओडीओपी योजना के तहत स्थापित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) केवल सीमित लोगों तक न रहकर अधिक से अधिक कारीगरों, बुनकरों और सूक्ष्म उद्यमियों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाओं से जोड़ें।
इसी उद्देश्य से मंगलवार को प्रदेश में संचालित 16 सीएफसी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई सीएफसी में सीमित लाभार्थियों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि योजनाओं का लाभ केवल कुछ सदस्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य से सीएफसी परियोजनाओं में 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान और 10 प्रतिशत उद्यमियों का योगदान रखा गया है, ताकि छोटे उद्यमियों को आधुनिक मशीनरी, डिजाइन, परीक्षण, स्किल ट्रेनिंग और कॉमन टूल्स जैसी सुविधाएं सुलभ हो सकें।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएफसी को जनहित से जोड़ते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इसके लिए मोबाइल संदेश, पम्पलेट, उद्योग बंधु बैठकों और मीडिया माध्यमों का उपयोग करने को कहा गया। साथ ही सभी सीएफसी में ‘सिटीजन चार्टर’ प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए, जिससे लोगों को उपलब्ध सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
बैठक में अंबेडकर नगर, मुरादाबाद, संभल, वाराणसी, खुर्जा, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, अयोध्या और गाजियाबाद सहित विभिन्न जिलों की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। अंबेडकर नगर बुनकर सीएफसी में लगभग 4 करोड़ रुपए की सहायता से स्थापित परियोजना में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि अधिक बुनकर आधुनिक सुविधाओं से जुड़ सकें।
वहीं बनारस के सिल्क उत्पाद सीएफसी में लगभग 9 करोड़ रुपए की सहायता से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं को व्यापक स्तर पर कारीगरों तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
बैठक में बुनकरों और कारीगरों ने बिजली, धागे की लागत, बाजार प्रतिस्पर्धा और तकनीकी उन्नयन से जुड़े मुद्दे भी रखे। समीक्षा के दौरान बताया गया कि योगी सरकार ने बुनकरों को राहत देने के लिए वर्षों तक फ्लैट रेट विद्युत योजना लागू रखी, जिसके तहत 2006 से 31 मार्च 2023 तक लगभग 44 करोड़ रुपए का विद्युत व्यय सरकार द्वारा वहन किया गया। सरकार की प्राथमिकता है कि पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े लोग आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें।
गाजियाबाद के इंजीनियरिंग एवं टूल रूम आधारित सीएफसी की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वहां सीएनसी मशीन, 3डी प्रिंटिंग, मटेरियल टेस्टिंग और स्किल ट्रेनिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 500 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और रक्षा क्षेत्र के लिए कंपोनेंट निर्माण की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।
मुरादाबाद के फिजिकल वेपर डिपोजिशन (पीवीडी) प्लांट को पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उदाहरण बताते हुए उसकी कार्यक्षमता को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। वहीं संभल के बटन उद्योग सीएफसी में 70 प्रतिशत से अधिक क्षमता उपयोग को सकारात्मक संकेत बताते हुए कच्चे माल और बिजली उपलब्धता को और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
खुर्जा ब्लैक पॉटरी सीएफसी को बैठक में सफलता की मिसाल बताया गया। इस परियोजना से 1,253 से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं और कारोबार 15-20 लाख रुपए से बढ़कर 90-95 लाख रुपए तक पहुंचा है। इसे पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया। कारीगरों द्वारा मिट्टी भंडारण के लिए अतिरिक्त भूमि की मांग भी बैठक में रखी गई।
सहारनपुर वुड क्राफ्ट, आगरा लेदर क्लस्टर, बरेली और मेरठ के गुड़ प्रसंस्करण सीएफसी की भी समीक्षा की गई। मेरठ परियोजना में 1,800 किसानों को जोड़कर मूल्य संवर्धन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उद्योग बंधु बैठकों का आयोजन सीएफसी परिसरों में किया जाए और बड़ी उद्योग इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर छोटे उद्यमों को बड़े बाजार और सप्लाई चेन से जोड़ा जाए।
–आईएएनएस
एसके/
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