देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे तीर्थ पुरोहितों और तीर्थ समाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक ने प्रधानमंत्री को इस संबंध में गुरुवार को एक पत्र लिखा है।
पत्र में महेश पाठक ने कहा है कि लॉकडाउन के कारण तीर्थ पुरोहित एवं तीर्थ समाज भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। तीर्थाटन को गति देने वाले तीर्थ पुरोहितों एवं तीर्थ समाज के सामने भरण पोषण की समस्या पैदा हो गई है। तीर्थ पुरोहित एवं तीर्थ समाज वास्तव में तीर्थाटन के केंद्र बिन्दु हैं।
उन्होंने कहा, तीर्थ पुरोहित के द्वारा तीर्थयात्रियों के साथ किए जाने वाले सद्व्यवहार से ही तीर्थाटन को गति मिलती है। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए घेषित लॉकडाउन के कारण तीर्थाटन पूरी तरह से बंद है। तीर्थ पुरोहित एवं तीर्थ समाज सामान्यतया तीर्थाटन में तीर्थयात्रियों की मदद कर एवं यजमानी से 10 से 15 हजार प्रतिमाह दान स्वरूप पाकर अपना जीवन यापन करते रहे हैं जो अब पूरी तरह बंद है।
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उनका कहना था कि अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा, वाराणासी रामेश्वरम, द्वारका, त्रयम्बकेश्वर, उज्जैन, नैमिषारण्य, हरिद्वार, केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि प्रमुख तीर्थस्थलों में आनेवाले तीर्थयात्रियों की संख्या जहां अधिक होती है वहीं अन्य तीर्थों में कम होती है।
दोनों ही स्थानों पर तीर्थ पुरोहित एवं तीर्थ समाज को अपने जीविकोपार्जन के लिए बड़ा संघर्ष करना पड़ता है क्योंकि जहां तीर्थयात्री अधिक आते हैं वहां तीर्थ पुरोहित एवं तीर्थ समाज की संख्या अधिक होती है और जहां तीर्थयात्री कम आते हैं वहां पर तीर्थ पुरोहित एवं तीर्थ समाज की आय भी कम हो जाती है।
दोनों ही अवस्थाओं में वे रोज कुंआ खोदते हैं और पानी पीते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किये जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए महेश पाठक ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान तीर्थ पुरोहितों ने भी तीर्थस्थलों में फंसे तीर्थयात्रियों की मदद कर उनके कार्य में एक प्रकार से सहयोग ही किया है।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि मोदी सरकार द्वारा औद्योगिक इकाइयों से लेकर, दिहाड़ी मजदूरों, व्यापारियों, संगठित और असंगठित मजदूरों तथा गरीब वर्ग की जिस प्रकार से आर्थिक सहायता एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जा रही है उसी प्रकार से तीर्थ पुरोहित एवं तीर्थ समाज की मदद वर्तमान में उनके परिवार के भरण पोषण के लिए भी आवश्यक है।
अध्यक्ष ने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री से तीर्थ पुरोहित एवं तीर्थ समाज को भी आर्थिक सहायता एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सरकार द्वारा देने की श्रेणी में रखने का अनुरोध किया है।


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