‘अब मिटेंगे गुलामी के निशान, सेवा तीर्थ बना स्वाभिमान का प्रतीक…’, उद्घाटन के बाद बोले PM मोदी

PM on Seva Teerth (image: social media )

PM on Seva Teerth: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी  शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। इसके  बाद  उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए इसे भारत की विकास यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन ऐतिहासिक है और देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को मजबूत करने वाला है। प्रधानमंत्री ने विजया एकादशी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस शुभ दिन पर लिया गया संकल्प सफलता की ओर ले जाता है। आज हम विकसित भारत के लक्ष्य के साथ सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं।

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PM on Seva Teerth: औपनिवेशिक सोच से मुक्ति की पहल

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक देश के महत्वपूर्ण फैसले नॉर्थ और साउथ ब्लॉक जैसी इमारतों से लिए गए, लेकिन ये भवन ब्रिटिश शासन की सोच के प्रतीक थे। अंग्रेजों ने अपनी सत्ता को मजबूत दिखाने के लिए रायसीना हिल्स पर इन इमारतों का निर्माण कराया था। उनका उद्देश्य यह संदेश देना था कि शासन जनता से ऊपर है।

उन्होंने बताया कि 1911 में राजधानी को कोलकाता से दिल्ली लाया गया और उसके बाद अंग्रेजों की जरूरतों के अनुसार नई इमारतें बनाई गईं। उस दौर में बनाए गए भवन ब्रिटिश सम्राट की मानसिकता को दर्शाते थे। इसके विपरीत, सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारतीयों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। यहां से लिए जाने वाले फैसले किसी शासक की इच्छा नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए होंगे।

PM on Seva Teerth (image: social media )
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PM Modi speech: आधुनिक सुविधाओं की जरूरत

प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब 100 साल पुराने भवन अब समय की जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गए थे। जगह की कमी, तकनीकी सुविधाओं की सीमाएं और जर्जर होती संरचना बड़ी चुनौती बन रही थी। दिल्ली में कई मंत्रालय अलग-अलग स्थानों पर चल रहे थे, जिन पर हर साल हजारों करोड़ रुपये किराए में खर्च हो रहे थे। कर्मचारियों को रोज एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। नए भवनों के निर्माण से खर्च में कमी आएगी, कामकाज तेज होगा और कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ेगी। यह कदम प्रशासन को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में उठाया गया है।

सेवा ही शासन का मूल मंत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद भी देश में गुलामी के कई प्रतीक बने रहे। 2014 के बाद सरकार ने इन प्रतीकों से मुक्ति का अभियान शुरू किया। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और पुलिस स्मारक जैसे निर्माण इसी सोच का परिणाम हैं। रेसकोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग करना भी सत्ता के स्वरूप को सेवा की भावना से जोड़ने का प्रयास था। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाम बदलना केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि सोच में बदलाव का प्रतीक है। ‘सेवा तीर्थ’ नाम यह दर्शाता है कि शासन का उद्देश्य जनता की सेवा है। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है, “सेवा परमो धर्मः”, यानी सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

PM on Seva Teerth (image: social media )
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विकसित भारत की ओर मजबूत कदम

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज तेजी से आगे बढ़ रहा है। नए सुधार, अंतरराष्ट्रीय समझौते और आर्थिक प्रगति देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। पिछले वर्षों में शासन की कार्यशैली बदली है, जहां हर निर्णय के केंद्र में नागरिक को रखा गया है। “नागरिक देवो भवः” की भावना को अपनाते हुए सरकार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ में लिया गया हर फैसला देश के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। हम यहां अधिकार जताने नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने आए हैं। जब शासन सेवा की भावना से चलता है, तो परिणाम भी सकारात्मक होते हैं। यही सोच विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगी।

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