चंडीगढ़, 1 मई (आईएएनएस)। पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली और सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाए हैं, वहीं राज्य सरकार के मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विपक्ष पर माहौल खराब करने का आरोप लगाया है।
राजा वारिंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर टिप्पणी करते हुए कहा, “सरकार के अपने नियम-कायदे होते हैं और उनका पालन होना जरूरी है। यदि इन नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। अगर विपक्ष किसी मुद्दे को उठाता है और सरकार उसे खारिज करती है, तो मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वे तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करें और अपनी बात साबित करें।”
नशे के मुद्दे पर भी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा, “पंजाब में नशे की समस्या जगजाहिर है और पूरी दुनिया इस स्थिति से वाकिफ है। केवल अभियान चलाने की घोषणा से कुछ नहीं होगा, बल्कि सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।”
साथ ही उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा से समझौता नहीं किया जा सकता।
विश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर भी वारिंग ने आरोप लगाया, “सरकार दबाव में है और विश्वास प्रस्ताव को पहले लाना और फिर उसे रद्द करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं और इससे राजनीतिक अस्थिरता का संकेत मिलता है।”
वहीं, पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा द्वारा पूरे सदन का डोप टेस्ट कराने की मांग पर राज्य सरकार के मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “केवल किसी एक नेता के कह देने से कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। सदन को स्पीकर के दिशा-निर्देशों और स्थापित नियमों के अनुसार चलाया जाता है।”
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर हर कोई अपनी-अपनी मांग रखने लगे, तो सदन की कार्यवाही चलाना मुश्किल हो जाएगा।
गोयल ने विधानसभा सत्र को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि सत्र अब तक सुचारू रूप से चल रहा है और मुख्यमंत्री ने भी इसकी सराहना की। उन्होंने आरोप लगाया, “कुछ लोग जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सरकार चाहती है कि सदन की कार्यवाही सकारात्मक और रचनात्मक ढंग से आगे बढ़े।”
दूसरी ओर, प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में सदन में इस तरह के आरोप लगाए गए। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी मुख्यमंत्री ने सदन के चुने हुए नेता पर इस तरह का आरोप लगाया हो और फिर उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया हो।”
स्पीकर की भूमिका पर भी बाजवा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “स्पीकर का कर्तव्य है कि वह सदन की परंपराओं, मूल्यों और गरिमा की रक्षा करें। यदि स्पीकर इस जिम्मेदारी को निभाने में असफल रहते हैं, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।”
–आईएएनएस
एससीएच
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