राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं के निकट और अधिक किसान प्रदर्शनकारी पहुंच रहे हैं और आंदोलन तेज होता प्रतीत हो रहा है। नए कृषि कानून के खिलाफ आज लगातार छठे दिन किसान दिल्ली की बॉर्डर पर अड़े हैं। वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी किसानों के समर्थन में हैं वहीं केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने किसानों के प्रदर्शन को लेकर मंगलवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि उसे अंहकार छोड़कर किसानों को उनका अधिकार देना चाहिए।
अन्नदाता सड़कों-मैदानों में धरना दे रहे हैं,
और
‘झूठ’ टीवी पर भाषण!किसान की मेहनत का हम सब पर क़र्ज़ है।
ये क़र्ज़ उन्हें न्याय और हक़ देकर ही उतरेगा, न कि उन्हें दुत्कार कर, लाठियाँ मारकर और आंसू गैस चलाकर।
जागिए, अहंकार की कुर्सी से उतरकर सोचिए और किसान का अधिकार दीजिए।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 1, 2020
राहुल ने ट्वीट कर कहा कि “अन्नदाता सड़कों-मैदानों में धरना दे रहे हैं, और ‘झूठ’ टीवी पर भाषण! किसान की मेहनत का हम सब पर कर्ज है। ये कर्ज उन्हें न्याय और हक़ देकर ही उतरेगा, न कि उन्हें दुत्कार कर, लाठियां मारकर और आंसू गैस चलाकर। जागिए, अहंकार की कुर्सी से उतरकर सोचिए और किसान का अधिकार दीजिए।”
बता दें कि किसानों की समस्याओं पर सरकार से बातचीत के लिए आमंत्रण मिलने के बाद किसान संगठन जल्द ही इस पर फैसला लेंगे। इसके लिए पंजाब के किसान संगठनों की जल्द एक बैठक होने जा रही है। सरकार ने किसानों से जुड़े मसलों पर बातचीत के लिए किसान संगठनों को आज (मंगलवार को) दोपहर तीन बजे नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन बुलाया है।
किसान नेता कृपा सिंह ने बताया कि थोड़ी ही देर में किसान संगठनों के नेताओं की एक बैठक होने जा रही है जिसमें सरकार से बातचीत के लिए जाने को लेकर फैसला लिया जाएगा। बातचीत के मुद्दों को लेकर पूछे गए सवाल पर कृपा सिंह ने कहा किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं और बातचीत के लिए सबसे अहम मसला यही है।
इसके अलावा किसान नेता पराली और बिजली बिल से संबधित अपनी मांगों पर भी चर्चा करना चाहते हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदर्शनकारी किसानों को आंदोलन का रास्ता छोड़कर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए चर्चा करने की अपील की है।


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