एक दूरदर्शी की विरासत और एक पिता का दिल: स्वर्गीय राजू पी पुथरन को एक भावभीनी श्रद्धांजलि

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Raju P. Putharan: स्वर्गीय राजू पी पुथरन को एक भावभीनी श्रद्धांजलि, फादर्स डे (पितृ दिवस) एक ऐसा अवसर है जब हम उन महान शख्सियतों को याद करते हैं जिनके मार्गदर्शन में हमारा जीवन संवरा। यह उन मूक नायकों को नमन करने का दिन है जिन्होंने अपना पूरा जीवन दुनिया को अधिक दयालु और सुंदर बनाने में समर्पित कर दिया। जो लोग उन्हें जानते थे, उनके लिए स्वर्गीय श्री राजू पी. पुथ्रन ठीक ऐसे ही एक मार्गदर्शक, एक निस्वार्थ परोपकारी और समाज में अच्छाई की एक बड़ी मिसाल थे। दुनिया भले ही उन्हें ‘सरस्वती फाउंडेशन’ के दूरदर्शी संस्थापक के रूप में…

Raju P. Putharan: स्वर्गीय राजू पी पुथरन को एक भावभीनी श्रद्धांजलि, फादर्स डे (पितृ दिवस) एक ऐसा अवसर है जब हम उन महान शख्सियतों को याद करते हैं जिनके मार्गदर्शन में हमारा जीवन संवरा। यह उन मूक नायकों को नमन करने का दिन है जिन्होंने अपना पूरा जीवन दुनिया को अधिक दयालु और सुंदर बनाने में समर्पित कर दिया। जो लोग उन्हें जानते थे, उनके लिए स्वर्गीय श्री राजू पी. पुथ्रन ठीक ऐसे ही एक मार्गदर्शक, एक निस्वार्थ परोपकारी और समाज में अच्छाई की एक बड़ी मिसाल थे।

दुनिया भले ही उन्हें ‘सरस्वती फाउंडेशन’ के दूरदर्शी संस्थापक के रूप में याद करती है, लेकिन उनका परिवार उन्हें इससे भी बढ़कर मानता है, अपनी पत्नी सरस्वती राजू पुथ्रन के लिए एक समर्पित पति, और अपने बच्चों सुधीर राजू पुथ्रन और सुपिता सी. कुंदर के लिए एक बेहद प्यारे और आदर्श पिता।

व्यक्तिगत संघर्ष से उपजी एक दूरदर्शी सोच

Raju P. Putharan
 

कहा जाता है कि बड़े बदलाव अक्सर व्यक्तिगत संघर्षों से ही जन्म लेते हैं, और राजू पी पुथरन का जीवन भी इसका अपवाद नहीं था। अपने शुरुआती जीवन में, आर्थिक तंगियों के कारण उन्हें अपनी औपचारिक शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी थी। लेकिन उन्होंने इस कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा मिशन बना लिया।

उन्होंने संकल्प लिया कि धन के अभाव के कारण किसी भी बच्चे को अपने सपनों का त्याग नहीं करना पड़ेगा।इसी दृढ़ संकल्प के साथ, उन्होंने साल 2012 में ‘सरस्वती फाउंडेशन’ की स्थापना की। पिछले एक दशक में, इस जमीनी पहल ने एक छोटे से प्रयास से बढ़कर समाज कल्याण के एक मजबूत स्तंभ का रूप ले लिया, जिसने कर्नाटक और महाराष्ट्र में हजारों जरूरतमंद जिंदगियों को बदल कर रख दिया।

समाज कल्याण में योगदान

सरस्वती फाउंडेशन के कार्य अपने फाउंडेशन के माध्यम से, राजू पी पुथरन ने समाज सेवा का एक विशाल और बहुआयामी नेटवर्क तैयार किया। वह अच्छी तरह समझते थे कि समाज के वास्तविक उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और बुनियादी ढांचे पर एक साथ काम करना जरूरी है। समाज के प्रति उनके कुछ प्रमुख योगदान इस प्रकार हैं:

शिक्षा का अधिकार: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को महत्वपूर्ण छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) और रियायती शिक्षा प्रदान करना, ताकि पैसे की कमी किसी बच्चे के भविष्य के आड़े न आए।

रचनात्मक विकास: बच्चों में आत्मविश्वास, आत्म-अभिव्यक्ति और खुशी की भावना जगाने के लिए स्कूल स्तर पर क्षेत्रीय चित्रकला, लेखन और नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन करना।

स्वास्थ्य सेवाएं: चिकित्सा सहायता के लिए धन उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित करना, योग शिविर लगाना और पुनर्वास केंद्रों (rehabilitation centers) को हर संभव मदद देना।सामाजिक सुरक्षा: वृद्धाश्रमों, अनाथालयों को निरंतर संसाधन प्रदान करना और प्राकृतिक आपदाओं के समय पीड़ितों तक तुरंत राहत सामग्री पहुँचाना।

सांस्कृतिक संरक्षण: ऐतिहासिक विष्णुमूर्ति मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए धन देने सहित स्थानीय धरोहर परियोजनाओं का नेतृत्व करना और राष्ट्रीय मंचों पर क्षेत्रीय गौरव को बढ़ावा देना।

परिवार का आधार

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एक अच्छे पति और पिताहर महान सामाजिक नेता के पीछे एक मजबूत और सुखी पारिवारिक जीवन होता है। राजू पी पुथरन ने केवल बाहरी दुनिया को ही नहीं संवारा, बल्कि अपने घर को भी प्रेम और खुशियों का मंदिर बनाया। एक खूबसूरत जीवनसाथीउनका जीवन अपनी पत्नी सरस्वती राजू पुथ्रन के प्रति गहरे समर्पण से बंधा हुआ था। उनका वैवाहिक जीवन गहरे प्रेम, आपसी सम्मान और साझा आदर्शों पर आधारित एक सच्ची साझेदारी था। उन्होंने अपने जीवन के सबसे बड़े और नेक कार्य (फाउंडेशन) का नाम भी अपनी पत्नी के नाम पर रखकर उन्हें सम्मानित किया। आज, उनके जाने के बाद भी, श्रीमती सरस्वती राजू पुथ्रन उनके इस नेक काम को आगे बढ़ा रही हैं और उनके सपनों को जिंदा रखे हुए हैं।

एक असाधारण पिताअपने बच्चों, सुधीर राजू पुथ्रन और सुपिता सी. कुंदर के लिए वह हमेशा सबसे बड़े रोल मॉडल रहे। वह एक ऐसे पिता थे जिन्होंने उपदेश देने के बजाय अपने कर्मों से राह दिखाई। उन्होंने अपने बच्चों को सिखाया कि वास्तविक सफलता इस बात से मापी जाती है कि आप दूसरों को क्या देते हैं। उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा वह अटूट भावनात्मक सहारा, प्यार और बुद्धिमत्ता दी जिसकी बदौलत वे अपने जीवन की राह चुन सके, और साथ ही उन्हें सहानुभूति और नैतिक साहस की समृद्ध विरासत भी सौंपी। आज उनके बेटे सुधीर को सरस्वती फाउंडेशन के सह-संस्थापक (Co-Founder) के रूप में इस सामाजिक यात्रा को आगे बढ़ाते देखना, एक पिता के रूप में उनकी सबसे बड़ी और खूबसूरत जीत है।

समाज को सशक्त बनाने वाले एक सच्चे मार्गदर्शक

फादर्स डे पर एक कभी न मिटने वाली विरासत राजू पी पुथरन आज भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी उपस्थिति हर उस बच्चे की मुस्कान में महसूस होती है जिसे छात्रवृत्ति मिलती है, हर उस परिवार में होती है जिसकी मदद की गई, और हर उस समाज में दिखती है जिसे उन्होंने सशक्त बनाया। इस फादर्स डे पर, हम एक ऐसे व्यक्ति का जश्न मना रहे हैं जो पूरी तरह से दूसरों के लिए जिया।

वह समाज के लिए एक क्रांतिकारी दूरदर्शी थे, अपनी पत्नी के लिए एक सच्चे जीवनसाथी थे, और सुधीर और सुपिता के लिए एक सुरक्षात्मक और बेहद प्यार करने वाले पिता थे। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि इतिहास बदलने के लिए आपको बहुत बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं है, आपको बस एक मजबूत इरादे, दयालु दिल और सेवा की भावना की आवश्यकता है।एक सच्चे नायक को फादर्स डे की हार्दिक बधाई। आपका प्रकाश हमेशा हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा।

Bhawana Rawat

भावना रावत पिछले 2 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम की खबरें लिखने में रुचि है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं।