नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर सियासी बयानबाजियां जारी है। इस बीच, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। साथ ही, उन्होंने अयोध्या बार एसोसिएशन के उस प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सुझाव पर भी उन्होंने टिप्पणी की।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना बेहद दुखद है। चोरी हुई है और हम सबको इसका दुख है। यह बहुत कष्ट की बात है और ऐसा नहीं होना चाहिए था। हम इस बात को स्वीकार करते हैं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। अब हर स्तर पर प्रयास होना चाहिए कि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए, उनके खिलाफ मुकदमा कायम हो, रोजाना सुनवाई हो और उन्हें उचित दंड मिले। यही इस घटना का वास्तविक प्रायश्चित होगा।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अयोध्या बार एसोसिएशन द्वारा यह निर्णय लेने पर कि कोई भी वकील आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा, आलोक कुमार ने कहा कि उनकी आरोपियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है और उन्हें कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस प्रस्ताव को कानूनी दृष्टि से उचित नहीं माना। उन्होंने कहा कि यह तो स्पष्ट है कि चढ़ावे की चोरी हुई है और मेरी उनसे कोई सहानुभूति नहीं हो सकती। उन्हें जेल जाना चाहिए और अपने कर्मों का परिणाम भुगतना चाहिए। लेकिन यह प्रस्ताव मुझे कुछ अधिक राजनीतिक प्रतीत होता है।
आलोक कुमार ने इस संदर्भ में वर्ष 2011 के एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कोयंबटूर बार एसोसिएशन ने भी एक आरोपी की पैरवी न करने का प्रस्ताव पारित किया था। बाद में उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को न्यायालय में अपना बचाव करने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रोफेशनल एथिक्स के नियमों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति किसी वकील के पास अपने मुकदमे के लिए जाता है और निर्धारित फीस देता है, तो वकील केवल इस आधार पर मुकदमा लड़ने से इनकार नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे प्रस्तावों को संविधान, कानून और पेशेवर नैतिकता के विरुद्ध माना था। इसलिए अयोध्या बार एसोसिएशन को भी सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का अध्ययन करना चाहिए।
बातचीत के दौरान आलोक कुमार ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि राम मंदिर में भगवान की सेवा का कार्य केवल सनातनी वैष्णव और संत परंपरा के पूर्ण समर्पित लोगों को ही सौंपा जाना चाहिए। शास्त्री के इस बयान पर आलोक कुमार ने कहा कि मुझे लगता है कि ट्रस्टियों को इस विषय पर पूरी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
–आईएएनएस
पीएसके
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