राम मंदिर ड्रेस कोड पर संतों-विद्वानों से भी सहमति जरूरी: परमहंस आचार्य

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अयोध्या, 16 अगस्त (आईएएनएस)। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मस्थान अयोध्या के राम मंदिर में पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया गया है। इस फैसले पर तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगदगुरु परमहंस आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ड्रेस कोड को अच्छी पहल बताया लेकिन साथ ही कहा कि इसे पुजारियों पर थोपा न जाए और इसको लेकर संतों और विद्वानों से सहमति ली जाए। जगदगुरु परमहंस आचार्य ने आईएएनएस से कहा, “मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम लल्ला के मंदिर में ड्रेस कोड होना अच्छी बात है। जैसे भगवान के वस्त्र बदलते रहते हैं, वैसे ही तय रंगों के…

अयोध्या, 16 अगस्त (आईएएनएस)। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मस्थान अयोध्या के राम मंदिर में पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया गया है। इस फैसले पर तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगदगुरु परमहंस आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ड्रेस कोड को अच्छी पहल बताया लेकिन साथ ही कहा कि इसे पुजारियों पर थोपा न जाए और इसको लेकर संतों और विद्वानों से सहमति ली जाए।

जगदगुरु परमहंस आचार्य ने आईएएनएस से कहा, “मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम लल्ला के मंदिर में ड्रेस कोड होना अच्छी बात है। जैसे भगवान के वस्त्र बदलते रहते हैं, वैसे ही तय रंगों के अनुसार सातों दिन के लिए सात रंग होने चाहिए।”

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी निर्णय लेने से पहले अर्चकों और पुजारियों की राय लेना जरूरी है। उन्होंने कहा, “पुजारियों की सहमति भी ज़रूरी है और उनसे सलाह भी ली जानी चाहिए। उनके साथ-साथ और भी विद्वानों की सहमति ली जाए कि क्या बेहतर रहेगा।”

परमहंस आचार्य ने कहा, “जो भी ड्रेस कोड लागू किया गया है, उसे पुजारियों पर थोपा नहीं जाना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें ही कपड़े उपलब्ध कराए जाने चाहिए। राम मंदिर प्रशासन को उन्हें कपड़े देने चाहिए और बताना चाहिए कि उन्हें सातों दिन के लिए सात रंगों के कपड़े दिए जा रहे हैं।”

इसी दौरान जगदगुरु ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे विवाद पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे राष्ट्रगीत का सम्मान करें और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में राष्ट्रवाद की लक्ष्मण रेखा न लांघें।

उन्होंने कहा, “मैं सभी सांसदों से गुजारिश करूंगा कि वे ‘वंदे मातरम’ का अपमान न करें और आरोप-प्रत्यारोप की भी एक सीमा होनी चाहिए। आरोप-प्रत्यारोप करते समय ऐसा न हो कि आप राष्ट्रवाद की लक्ष्मण रेखा पार कर जाएं। मुझे उस दिन सभी सांसदों पर बहुत गर्व हुआ था, जब ‘वंदे मातरम’ बजते ही सभी लोग खड़े हो गए थे। बहुत अच्छा लगा। ऐसा ही होना चाहिए। राष्ट्रीय सर्वोपरि है, यह दिखना चाहिए।”

उन्होंने राहुल गांधी सहित सभी नेताओं से कहा कि वे देशहित को सर्वोपरि रखें और जनहित के मुद्दों को उठाएं।

–आईएएनएस

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IANS Agency

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