नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। कोरल रीफ (मूंगा चट्टानें) समुद्र की तलहटी में निर्मित होने वाली अद्भुत और जीवंत संरचनाएं हैं। इनका निर्माण सूक्ष्म समुद्री जीवों द्वारा किया जाता है। ये लाखों वर्षों की प्रक्रिया होती है, जिसमें पॉलिप्स कोरल रीफ में विकसित होकर विशाल चट्टानी स्वरूप ले लेते हैं। जैव विविधता के मामले में समृद्ध होने के कारण इन्हें ‘समुद्र के वर्षावन’ की संज्ञा दी गई है। यद्यपि ये समुद्र तल के मात्र एक प्रतिशत हिस्से में फैली हैं, किंतु समुद्री जीवन की लगभग 25 प्रतिशत प्रजातियों को आश्रय, भोजन और सुरक्षा प्रदान करती हैं।
ये रीफ न केवल तटीय क्षरण (कटाव) को रोककर चक्रवातों से सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि पर्यटन और मत्स्य पालन के जरिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कोरल रीफ समुद्र की जैव-विविधता, तटीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी हैं। इनकी रक्षा के बिना समुद्री जीवन और तटीय समुदायों पर गंभीर संकट आ सकता है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी के रिसर्च साइंटिस्ट और कोरल रीफ विशेषज्ञ इनके महत्व पर विस्तार से जानकारी देते हैं। रीफ, कोरल और कोरल रीफ में अंतर भी बताते हैं। रीफ समुद्र तल से ऊंची टीले जैसी संरचनाएं होती हैं, जो प्राकृतिक या मानव-निर्मित हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रीफ कोई भी ऐसी संरचना है जो समुद्र तल से ऊपर उठी हुई हो। इसमें पुरानी कारों के टायर या प्राकृतिक चट्टानें भी शामिल हो सकती हैं।
कोरल मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय समुद्री क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनका निर्माण सूक्ष्म ‘पॉलिप्स’ द्वारा होता है, जिनका व्यास मात्र कुछ मिलीमीटर होता है। प्रत्येक पॉलिप में एक मुख और दंश कोशिका युक्त ‘टेंटेकल्स’ (स्पर्शक) होते हैं। इन पॉलिप्स के सामूहिक समूह को ‘कोरल कॉलोनी’ कहा जाता है। मुख्य रूप से कोरल दो श्रेणियों में विभाजित हैं—कठोर और कोमल। कठोर कोरल कैल्शियम कार्बोनेट का उत्सर्जन कर सुदृढ़ ढांचे का निर्माण करते हैं, जबकि कोमल कोरल मांसल और लचीले होते हैं।
कोरल रीफ मुख्य रूप से कठोर कोरल की सामूहिक संरचना होती है। दुनिया का सबसे बड़ा कोरल रीफ ऑस्ट्रेलिया का ग्रेट बैरियर रीफ है, जो 2300 किलोमीटर से ज्यादा लंबा है और लगभग 3,48,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
स्वस्थ कोरल रीफ समुद्री जीवों को हजारों प्रजातियों का घर देते हैं, बैक्टीरिया से लेकर शार्क, ग्रूपर, स्नैपर और समुद्री कछुओं तक। ये तूफान और चक्रवातों के दौरान प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करते हैं और तटीय क्षेत्रों को 97 प्रतिशत तक नुकसान से बचा सकते हैं। लाखों लोग, खासकर द्वीपीय देशों में रहने वाले, अपनी रोजी-रोटी के लिए कोरल रीफ पर निर्भर हैं। ये मछली पकड़ने, पर्यटन और शैक्षणिक गतिविधियों से आय पैदा करते हैं। वैज्ञानिक कोरल से नई दवाएं बनाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जैसे एंटीबायोटिक दवाएं जो सामान्य दवाओं पर असर न करने वाले बैक्टीरिया के खिलाफ काम करती हैं।
कोरल रीफ के अस्तित्व के लिए ‘कोरल ब्लीचिंग’ एक गंभीर खतरा है। यह प्रक्रिया तब घटित होती है, जब समुद्री तापमान में वृद्धि के कारण कोरल ‘जूक्सैन्थेली’ नामक सूक्ष्म शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। ये शैवाल ही कोरल को रंगत और पोषण प्रदान करते हैं। शैवाल के अलग होने से कोरल का रंग सफेद पड़ जाता है और वे अत्यंत संवेदनशील व कमजोर हो जाते हैं। यदि तापमान लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहे, तो कोरल की मृत्यु हो जाती है और उन पर तंतुमय शैवाल का प्रभुत्व स्थापित हो जाता है, जिससे अंततः पूरी कोरल कॉलोनी नष्ट हो जाती है।
2023-2025 के दौरान हुई वैश्विक ब्लीचिंग घटना ने दुनिया के 84 प्रतिशत कोरल रीफ को प्रभावित किया, जो अब तक की सबसे गंभीर घटना है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2009 के बाद से 14 प्रतिशत कोरल रीफ पहले ही खत्म हो चुके हैं। बढ़ता प्रदूषण, गाद का जमाव भी रीफ के लिए खतरा है। गाद से पानी धुंधला हो जाता है और सूर्य की रोशनी कम पहुंचती है, जिससे जूक्सैन्थेली की प्रकाश संश्लेषण क्षमता घट जाती है।
–आईएएनएस
एमटी/एएस
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