चंडीगढ़, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री और कारोबारी संजीव अरोड़ा और उनके बिजनेस पार्टनर हेमंत सूद और चंद्रशेखर अग्रवाल के घरों और व्यापारिक ठिकानों पर शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की कार्रवाई शुरू की। ईडी की टीम ने लुधियाना, जालंधर और कुछ अन्य स्थानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान मंत्री संजीव अरोड़ा और उनके साझेदारों के घर और दफ्तरों की तलाशी ली गई।
सूत्रों के मुताबिक, यह जांच एक बड़े रियल एस्टेट और फाइनेंशियल नेटवर्क से जुड़ी बताई जा रही है। संजीव अरोड़ा हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (पूर्व में रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड) कंपनी के प्रमोटर हैं, जो पंजाब में बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स का काम करती है। उनके बेटे काव्या अरोड़ा अभी कंपनी के एमडी हैं और उनके यहां भी तलाशी ली जा रही है।
संजीव अरोड़ा की कंपनी पर कई तरह की गड़बड़ियों का शक है, जैसे पंजाब में जमीन के इस्तेमाल में गैर-कानूनी बदलाव करना, शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बिक्री दिखाना, शेयर बाजार में इनसाइडर ट्रेडिंग के घोटाले करना और यूएई से भारत में गलत तरीके से कमाए गए पैसों और गैर-कानूनी सट्टेबाजी के पैसों की राउंडट्रिपिंग करना।
हेमंत सूद लुधियाना, गुड़गांव और गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी में फाइंडोक फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट और स्टॉक ब्रोकर कंपनी चलाते हैं। उन्होंने संजीव अरोड़ा के साथ पार्टनरशिप की और यूएई से उनके गलत तरीके से कमाए गए पैसों की राउंडट्रिपिंग करने में और साथ ही इनसाइडर ट्रेडिंग से कमाए गए अपराध के पैसों को ठिकाने लगाने में उनकी मदद की। हेमंत सूद पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कई और सट्टेबाजी करने वालों और हवाला ऑपरेटरों की, अपराध के पैसों को मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए साफ करने और एफपीआई रूट से भारत में वापस लाने में मदद की।
वहीं, चंद्रशेखर अग्रवाल, जो जालंधर के एक बिजनेसमैन हैं, ने शुरू में एक क्रिकेट बुकी के तौर पर काम शुरू किया था और बाद में अपने काम को हवाला ऑपरेशन्स तक बढ़ाया। उन्होंने ‘खिलाड़ी बुक’ नाम से एक बुकी और सट्टेबाजी का प्लेटफॉर्म शुरू किया और सट्टेबाजी के प्लेटफॉर्म्स के जरिए हजारों गरीब लोगों को ठगा। अपराध से कमाए गए उनके पैसे, जो यूएई में जमा थे, उन्हें भी फाइंडोक के जरिए भारत वापस लाया गया और संजीव अरोड़ा के जरिए रियल एस्टेट में इन्वेस्ट किया गया।
संजीव अरोड़ा पर शक है कि वे अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके पंजाब में गैर-कानूनी सट्टेबाजी करने वालों को सुरक्षा दे रहे थे ताकि उनके मुनाफे में हिस्सा मिल सके। साथ ही, वे अपनी कंपनियों और कई एंट्री ऑपरेटरों का इस्तेमाल करके उनके बिना हिसाब वाले पैसों को जायज निवेश में बदल रहे थे और इस तरह मनी लॉन्ड्रिंग में सक्रिय रूप से मदद कर रहे थे।
संजीव अरोड़ा की कंपनियों पर कई फर्जी एक्सपोर्ट बिल बनाने, यूएई से पैसों की राउंडट्रिपिंग करने और ऐसी जीएसटी एंटिटीज से फर्जी खरीद दिखाने का भी शक है, जिनका असल में कोई वजूद ही नहीं है।
–आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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