नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पीजी संचालक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे में सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 अन्य घायल हुए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि शुरुआती जानकारी के विपरीत केवल कागजी मालिकाना हक ही नहीं, बल्कि पीजी के संचालन में भी परिवार की सक्रिय भूमिका थी। हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता द्वारा पीजी का संचालन किया जाता था। वहीं, भवन के दस्तावेजों में मालिक के तौर पर उर्मिला गुप्ता का नाम दर्ज है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक हादसे के बाद तीनों आरोपी गुरुग्राम स्थित अपने घर से फरार हो गए थे। बाद में उन्हें हरियाणा के भिवाड़ी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस का कहना है कि संबंधित भवन का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता और महेश गुप्ता के नाम पर था, जिससे उनके संचालन संबंधी जुड़ाव की पुष्टि होती है। जांच में यह भी पता चला है कि पिछले वर्ष भवन के बेसमेंट में पानी भर गया था। इसी वजह से बेसमेंट में मरम्मत और नवीनीकरण का काम कराया जा रहा था, जिसके दौरान यह हादसा हुआ।
जांच एजेंसियां एक किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) की भी जांच कर रही हैं, जिसकी प्रति सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है। बताया जा रहा है कि उस एग्रीमेंट में भवन मालिक की जिम्मेदारी से जुड़े कुछ प्रावधान दर्ज हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये शर्तें किसके कहने पर और किन परिस्थितियों में शामिल की गई थीं। इस संबंध में महेश गुप्ता से भी पूछताछ की जाएगी।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के अनुसार, फिलहाल जांच में यह सामने आया है कि परिवार सत्य निकेतन में पीजी और एक इमारत का संचालन कर रहा था। हालांकि यह भी जांच की जा रही है कि क्या इनके स्वामित्व या संचालन में अन्य भवन या पीजी भी हैं।
6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक इमारत ढह गई थी। हादसे के बाद एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। मलबे से कई लोगों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग उपचाराधीन हैं। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पुलिस ने बचाव अभियान पूरा होने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मलबे में अब किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका नहीं है। मामले में लापरवाही और जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच जारी है। वहीं, एमसीडी इस मामले में पहले ही अपने पांच अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है।
–आईएएनएस
एएमटी/वीसी
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