हरिद्वार, 11 जुलाई (आईएएनएस)। सावन माह के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर रोक लगाने के निर्णय का संत समाज ने स्वागत किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि भगवान के दरबार में सभी श्रद्धालु समान हैं। किसी भी भक्त के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। मंदिरों में दर्शन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर श्रद्धालु को समान अवसर मिले।
महंत रवींद्र पुरी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पूरा साधु समाज इस फैसले का समर्थन करता है। ईश्वर के घर में सभी के लिए एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों में, जैसे किसी वृद्ध महिला, वरिष्ठ नागरिक या विशेष आवश्यकता वाले व्यक्ति के लिए मंदिर प्रबंधन अलग व्यवस्था कर सकता है, लेकिन ऐसी व्यवस्था के लिए शुल्क लेना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई मंदिरों में टिकट आधारित दर्शन व्यवस्था पहले से लागू है और अब इसी प्रकार की व्यवस्था उत्तर भारत के कुछ प्रमुख मंदिरों, जैसे राम मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर में भी देखने को मिल रही है। हरिद्वार के प्रमुख मंदिरों में ऐसी कोई टिकट व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार स्वेच्छा से दान देते हैं और किसी पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाता।
अन्य मंदिरों में भी इस तरह की समान दर्शन व्यवस्था लागू किए जाने के सवाल पर महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो सभी मंदिरों के लिए एक समान अधिसूचना जारी कर सकती है। देश के कई बड़े मंदिर सरकारी प्रबंधन के अधीन संचालित होते हैं, जबकि साधु-संतों या धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित मंदिरों में सामान्यतः दर्शन के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर उन्होंने कहा कि प्रत्येक मंदिर प्रबंधन स्थानीय परिस्थितियों और श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार आवश्यक व्यवस्थाएं करता है। विशेष रूप से श्रावण मास और कांवड़ यात्रा के दौरान जलपान, चिकित्सा सहायता और सुचारु दर्शन व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि वीआईपी दर्शन के लिए मंदिर के सामान्य श्रद्धालुओं का रास्ता रोकना या मंदिर के द्वार बंद करना उचित नहीं है। यदि किसी विशेष व्यक्ति के दर्शन कराने की आवश्यकता होती भी है तो मंदिर प्रबंधन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे आम श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना और दर्शन प्रभावित न हों। हरिद्वार के दक्ष मंदिर सहित कई स्थानों पर इसी भावना के साथ व्यवस्थाएं की जाती हैं, जहां सामान्य श्रद्धालुओं के साथ ही विशेष अतिथियों को भी बिना किसी भेदभाव के दर्शन कराए जाते हैं।
–आईएएनएस
पीएसके
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