हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर SC ने कहा, ‘चिंता कानून का अभाव नहीं, उसे लागू करने को लेकर है’

Summary :

SC Refuses fresh Hate Speech Guidelines : सुप्रीम कोर्ट में हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई चली. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम् टिप्पणियां कीं. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकार को कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. साथ में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में नफरती भाषण पर रोक लगाने के लिए कोई भी नई दिशा-निर्देश जारी करने से मना कर दिया है. अदालत ने कहा की कोर्ट संसद या राज्य विधानसभाओं को नए क़ानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती. अदालतें ज्यादा से ज्यादा सुधार की जरूरत की ओर ध्यान…

SC Refuses fresh Hate Speech Guidelines : सुप्रीम कोर्ट में हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई चली. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम् टिप्पणियां कीं. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकार को कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती. साथ में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में नफरती भाषण पर रोक लगाने के लिए कोई भी नई दिशा-निर्देश जारी करने से मना कर दिया है.

अदालत ने कहा की कोर्ट संसद या राज्य विधानसभाओं को नए क़ानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती. अदालतें ज्यादा से ज्यादा सुधार की जरूरत की ओर ध्यान दिला सकती हैं लेकिन कानून बनाने का फैसला सरकार का ही है.

SC Refuses Fresh Hate Speech Guidelines: कानून को असरदार बनाने की मांग

SC Refuses Fresh Hate Speech Guidelines
SC Refuses Fresh Hate Speech Guidelines (Source: Social Media)

बता दें उच्च न्यायालय में हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई चल रही थी. इनमें केंद्र सरकार को हेट स्पीच के लिए लागू मौजूदा कानून की जांच करने और इन्हें और ज्यादा असरदार बनाने का निर्देश देने की मांग वाली याचिकाएं भी थीं.

इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ कर रही थी. उन्होंने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि, ‘हालांकि अदालत कार्रवाई की जरूरत की ओर ध्यान दिला सकती है लेकिन वह विधायिका को कानून बनाने का काम करने को सरकार को मजबूर नहीं कर सकती.

SC on Hate Speech: बताई कोर्ट का दायरा

बता दें, नहीं, भारत में अदालतें (सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट) सीधे तौर पर सरकार या संसद को कोई नया कानून बनाने के लिए मजबूर या आदेशित नहीं कर सकती हैं. यह शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत के तहत आता है, जिसके अनुसार कानून बनाना विधायिका का काम है, न कि न्यायपालिका का.

कोर्ट केवल कानून की व्याख्या कर सकती है और उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है, लेकिन नया कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती. इसी को आधार मानते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया.

New Hate Speech Guidelines: ‘चिंता क़ानून की नहीं, लागू करने की है’

New Hate Speech Guidelines
New Hate Speech Guidelines (Source: Social Media)

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि हेट स्पीच की समस्या से निपटने के लिए कोई कानून नहीं है या मौजूदा कानूनी ढांचे में ऐसे अपराधों से निपटने के लिए कोई सिस्टम नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असली चिंता कानून का अभाव नहीं, बल्कि उसे लागू करने को लेकर है.

पीठ ने कहा कि कई स्तरों पर कानन बनाए गए हैं. अगर पुलिस एफआईआर नहीं दर्ज करती है, तो पीड़ित व्यक्ति वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकता है और उसके बाद मजिस्ट्रेट के पास गुहार लगा सकता है. पीठ ने आगे कहा कि समस्या कानूनी प्रावधानों की कमी से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके लागू न होने से पैदा होती है.

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।