नई दिल्ली, 20 मई (आईएएनएस)। देवाधिदेव महादेव महादेव व माता पार्वती के पुत्र भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) को समर्पित स्कन्द षष्ठी का विशेष महत्व है। इस बार षष्ठी तिथि ज्येष्ठ शुक्ल की षष्ठी तिथि यानी 21 मई (गुरुवार) को पड़ रहा है। तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और गुरु पुष्य योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है।
श्रद्धालु स्कंद षष्ठी पर व्रत रखकर स्कन्द भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं। इसे कन्द षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। पंचमी तिथि गुरुवार की सुबह 8 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी। सूर्योदय 5 बजकर 27 मिनट और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 8 मिनट पर होगा। गुरुवार को नक्षत्र पुष्य रहने के कारण गुरु पुष्य योग बन रहा है। साथ ही पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बना हुआ है। यह तीनों योग स्कन्द षष्ठी को और भी शुभ बना रहे हैं। इन संयोगों में किए गए उपवास, पूजा-पाठ और दान का विशेष फल मिलता है।
गुरुवार को नक्षत्र पुष्य रहेगा, जो 22 मई की सुबह 2 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अश्लेषा रहेगा। गण्ड योग सुबह 10 बजकर 58 मिनट तक और करण बालव 8 बजकर 26 बजे तक, फिर कौलव शाम 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 5 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से 3 बजकर 29 मिनट, गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 7 मिनट से 7 बजकर 28 मिनट तक और अमृत काल शाम 8 बजकर 47 मिनट से 10 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 43 मिनट तक। इस समय किसी भी शुभ कार्य या पूजा से बचना चाहिए। यमगण्ड सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 10 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 8 बजकर 53 मिनट से 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे राहुकाल और अन्य अशुभ मुहूर्तों का ध्यान रखते हुए स्कन्द भगवान की पूजा करें। इस दिन उपवास रखना, स्कन्द मंत्र का जाप करना और ब्राह्मणों व जरुरतमंदों को दान देना अत्यंत शुभ व फलदायी माना गया है।
–आईएएनएस
एमटी/एएस
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