लखनऊ, 18 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी पारंपरिक चुनावी तौर-तरीकों के साथ सोशल मीडिया, डिजिटल माध्यमों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को भी अपने प्रचार अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि तकनीक के जरिए खासकर युवा मतदाताओं तक तेजी से पहुंच बनाई जा सकती है और गांवों से जुड़े स्थानीय मुद्दों को भी नए अंदाज में जनता के बीच ले जाया जा सकता है।
सपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, इस बार पार्टी के चुनावी एजेंडे में गरीब, किसान और युवा प्रमुख केंद्र में हैं। ऐसे में चुनावी राजनीति अब पोस्टर, बैनर, जनसभाओं और नुक्कड़ सभाओं तक सीमित नहीं रह गई है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकेंड का वीडियो भी हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। पार्टी का मानना है कि गांवों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को एआई आधारित डिजिटल सामग्री के जरिए प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज लगभग हर युवा के हाथ में मोबाइल है और वह तकनीक का इस्तेमाल करना जानता है। ऐसे में पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के जरिए स्थानीय समस्याओं और सरकार की नीतियों से जुड़े मुद्दों को डिजिटल माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। हाल के आंदोलनों और धरना-प्रदर्शनों के दौरान भी सोशल मीडिया के जरिए संदेश तेजी से लोगों तक पहुंचने का उदाहरण देखने को मिला है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रसून पांडेय के अनुसार, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले से ही सोशल मीडिया के जरिए राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं। उनके सोशल मीडिया मंचों पर राजनीतिक मुद्दों के साथ ऐसे वीडियो और दृश्य सामग्री भी दिखाई देती है, जिन्हें पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से अलग अंदाज में तैयार किया जाता है। इससे पार्टी के अन्य नेताओं और संभावित उम्मीदवारों के बीच भी डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को लेकर रुचि बढ़ी है।
पार्टी से जुड़े लोगों के मुताबिक, संभावित उम्मीदवार अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के स्थानीय मुद्दों को छोटे वीडियो और रील के जरिए लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों को डिजिटल सामग्री के जरिए युवाओं और आम मतदाताओं तक पहुंचाने पर जोर है। मकसद ऐसी सामग्री तैयार करना है, जिसे लोग आसानी से देख सकें और सोशल मीडिया पर साझा भी कर सकें। एआई ने इस पूरी प्रक्रिया को और आसान कर दिया है। पहले किसी वीडियो को तैयार करने के लिए कैमरा, संपादन टीम और कई घंटों की मेहनत की जरूरत होती थी।
अब एआई आधारित उपकरणों की मदद से वीडियो की पटकथा, आवाज, दृश्य प्रभाव, तस्वीरों की प्रस्तुति और छोटे वीडियो क्लिप तैयार करना आसान हो गया है। इससे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं और उनके डिजिटल अभियानों को कम समय में ज्यादा सामग्री तैयार करने में मदद मिल रही है। आने वाले विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया, डिजिटल नैरेटिव और युवा मतदाताओं तक पहुंच को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा ने कहा कि समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को अच्छी तरह समझता है। पार्टी एआई का इस्तेमाल पूरी तरह नैतिक, स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से करेगी। किसी भी तरह के फर्जी कंटेंट, गलत सूचना या अनैतिक इस्तेमाल से पार्टी दूर रहेगी। एआई के दौर में डीपफेक और फर्जी सामग्री चुनौती जरूर हैं, लेकिन हम अपनी आंखें और दिमाग खुले रखेंगे। अगर पार्टी या उसके नेताओं के खिलाफ फर्जी सामग्री प्रसारित की जाती है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। एआई के जरिए तैयार होने वाले कंटेंट में स्थानीय मुद्दों को भी प्रमुखता दी जाएगी, ताकि तकनीक के साथ जमीन से जुड़े सवालों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सके।
–आईएएनएस
विकेटी/डीकेपी
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