उत्तराखंड, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में एक बहुत ही अनोखा और रहस्यमय मंदिर है, जिसे धारी देवी मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर दूर अलकनंदा नदी के बीच में स्थित है। कहा जाता है कि यहां हर दिन एक चमत्कार देखने को मिलता है, जिसकी वजह से यह मंदिर लोगों की आस्था और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
धारी देवी मंदिर मां काली को समर्पित है। यह मंदिर झील के ठीक बीच में बना हुआ है, जिसकी वजह से इसे देखने के लिए नाव या पुल का इस्तेमाल करना पड़ता है। यह मंदिर सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं बल्कि, अपनी भव्यता को लेकर भी प्रसिद्ध है। दूर दूर से लोग माता रानी के इस अनोखे रूप को देखने के लिए आते हैं। मंदिर की शांति और प्राकृतिक सुंदरता भी पर्यटकों का मन मोहती है।
बुधवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मंदिर की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने लिखा, “पौड़ी गढ़वाल जनपद में पवित्र अलकनंदा नदी के मध्य विराजमान मां धारी देवी मंदिर आस्था, शक्ति और श्रद्धा का दिव्य संगम है। यह पावन धाम केवल एक मंदिर नहीं बल्कि समस्त प्रदेशवासियों की अटूट आस्था और विश्वास का केंद्र है। मान्यता है कि माँ धारी देवी उत्तराखंड के चारधामों की दिव्य रक्षक हैं। आप भी पौड़ी गढ़वाल जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।”
श्रीनगर-रुद्रप्रयाग मार्ग पर कलियासोड में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित मां धारी देवी मंदिर, 10 महाविद्याओं में से एक मां काली को समर्पित एक प्राचीन शक्तिपीठ है। माता धारी देवी की मूर्ति का ऊपरी हिस्सा यहां स्थित है, जबकि निचला हिस्सा कालीमठ में स्थित है। मान्यता है कि मूर्ति सुबह एक कन्या, दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा के रूप में रूप बदलती है।
यह मंदिर 500 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। लोगों का विश्वास है कि पांडव स्वर्ग जाते समय इसी जगह से होकर गुजरे थे। यहां माता रानी को उत्तराखंड की रक्षक देवी और चार धामों की संरक्षक के रूप में पूजा जाता है।
मान्यता यह भी है कि अगर माता की मूर्ति को उसके स्थान से हटाया जाता है, तो राज्य में कोई बड़ी आपदा आ सकती है। साल 2013 में एक हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के कारण मूर्ति को हटाया गया था, और कुछ ही घंटों बाद केदारनाथ में भयानक आपदा आ गई। इसके बाद फिर से मंदिर में माता की मूर्ति की स्थापना की गई थी।
–आईएएनएस
एनएस/पीएम
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



