लखनऊ, 1 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनहित में बड़ा निर्णय लेते हुए गंगा एक्सप्रेसवे को कमर्शियल ऑपरेशन डेट (सीओडी) से 15 दिनों तक टोल-फ्री रखने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत प्रदेश की जनता बिना किसी शुल्क के यूपी के सबसे लंबे व अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे का अनुभव कर सकेगी।
सीएम योगी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए परियोजना के कन्सेशनैयर्स आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर और अदाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर को 15 दिनों तक टोल कलेक्शन स्थगित रखने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यूपीडा द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस अवधि में यात्रियों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
यह निर्णय उस समय लिया गया है, जब इंडिपेंडेंट इंजीनियर द्वारा कंसेशन एग्रीमेंट के अनुच्छेद 14.3.1 के तहत प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किया गया, जिससे एक्सप्रेसवे की कमर्शियल ऑपरेशन डेट निर्धारित हो गई। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे आम जनता के उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार माना गया।
योगी सरकार का उद्देश्य है कि शुरुआती चरण में अधिक से अधिक लोग इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे का अनुभव कर सकें। 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर बिना टोल के यात्रा करने का अवसर लोगों को इसकी गुणवत्ता, गति और जन-सुविधाओं से सीधे रूबरू कराएगा। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि एक्सप्रेसवे के प्रति जनविश्वास को भी मजबूत करेगी।
गंगा एक्सप्रेसवे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत डीबीएफओटी (टोल) मॉडल पर विकसित किया गया है। इसके तहत कन्सेशनैयर्स को 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया है। हालांकि, 15 दिन की इस टोल छूट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई राज्य सरकार अथवा यूपीडा द्वारा कंसेशन एग्रीमेंट के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
यूपीडा ने स्पष्ट किया है कि टोल-फ्री अवधि के दौरान भी ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस से संबंधित सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। अनुच्छेद 17 सहित कंसेशन एग्रीमेंट के अन्य प्रावधानों के तहत सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जनपदों को जोड़ता है और इसे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। 15 दिन की यह टोल छूट न केवल आमजन को राहत देगी, बल्कि इस मेगा प्रोजेक्ट के प्रति सकारात्मक माहौल भी तैयार करेगी। इस फैसले को प्रदेश सरकार की ‘जनहित प्रथम’ नीति के रूप में देखा जा रहा है, जो राज्य में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ-साथ नागरिकों को ‘फील गुड’ कराने को भी प्राथमिकता देती है।
–आईएएनएस
एसके/एएस
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