Uttarakhand UCC Bill : Uttarakhand में UCC लागू, बदल गए शादी और वसीयत के ये नियम

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Uttarakhand UCC Bill : उत्तराखंड सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC Bill ) 2024 विधेयक पेश किया। यह विधेयक विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव करेगा। यह विधेयक धर्म के आधार पर भेदभाव को समाप्त करेगा। इसके अलावा विरासत के मामलों में महिलाओं को समान अधिकार मिलेंगे।

Highlights

  • विवाह की न्यूनतम आयु 18 और 21 वर्ष
  • द्विविवाह या बहुविवाह की प्रथाओं को गैरकानूनी घोषित
  • हलाला के लिए मजबूर करता है तो 1 लाख रुपये का जुर्माना 
  • पिता परिवार की संपत्ति को नहीं बेच सकता

Uttarakhand UCC में हुए मुख्य बदलाव जानना है जरूरी

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  • प्रस्तावित यूसीसी (Uttarakhand UCC Bill) हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और विशेष विवाह अधिनियम 1954 के अनुसार मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 और 21 वर्ष तय की गई है।

 

  • अब मुसलमान अपनी वसीयत के माध्यम से अपनी संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति को दे सकते हैं। लेकिन जब पूरी संपत्ति पर कोई वसीयत न हो, तो उसे कुरान और हदीस में दिए गए तरीके से विभाजित किया जाएगा और यह सुनिश्चित होगा कि कानूनी उत्तराधिकारी पूरी तरह से बेदखल नहीं होंगे।

 

  • प्रस्तावित यूसीसी (Uttarakhand UCC Bill) के अनुसार अगर मृत व्यक्ति अपने पीछे कोई वसीयत छोड़ता है तो इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है कि वह अपनी संपत्ति का कितना हिस्सा वसीयत कर सकता है या किसे दे सकता है।

 

  • अगर श्रेणी 1 का उत्तराधिकारी (Uttarakhand UCC Bill) अनुपस्थिति होगा तब संपत्ति श्रेणी-2 के उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित हो जाएगी। जिनमें भाई-बहन, भतीजी-भतीजे और दादा-दादी और अन्य शामिल हैं। यदि ऐसा कोई उत्तराधिकारी मौजूद नहीं है तो मृत व्यक्ति का सबसे करीबी रिश्तेदार संपत्ति प्राप्त कर सकता है।

 

  • यूसीसी विधेयक (Uttarakhand UCC Bill) में द्विविवाह या बहुविवाह की प्रथाओं को गैरकानूनी घोषित किया गया है। विवाह के समय किसी भी पक्ष के पास जीवित जीवनसाथी नहीं हो सकता है।

 

  • प्रस्तावित संहिता (Uttarakhand UCC Bill) में इद्दत और निकाह हलाला जैसी कुछ मुस्लिम विवाह प्रथाओं का भी स्पष्ट रूप से नाम लिए बिना उन्हें अपराध घोषित करती है। अगर कोई व्यक्ति हलाला के लिए मजबूर करता है या प्रेरित करता है तो ऐसे व्यक्ति को तीन साल तक की कैद की सजा हो सकती है। इसके अलावा 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

 

  • प्रस्तावित यूसीसी (Uttarakhand UCC Bill) के तहत एक संयुक्त हिंदू परिवार में एक बेटा-बेटी, पोता-पोती परपोते/परपोती को उनके जन्म के समय से संपत्ति का संयुक्त मालिक माना जाता है। यदि उसके वंशज जीवित हैं तो पिता संयुक्त परिवार की संपत्ति को अपनी इच्छा से बेच नहीं सकता है या उसे अलग नहीं कर सकता है।पैतृक संपत्ति चार पीढ़ियों तक संयुक्त रूप से रखी जाती है। हालाँकि स्व-अर्जित संपत्ति के मामले में पिता इसका निपटान करने के लिए स्वतंत्र है।

 

  • प्रस्तावित यूसीसी (Uttarakhand UCC Bill) के तहत जब कोई व्यक्ति बिना वसीयत किए मर जाता है तब इस मामले में माता-पिता दोनों को श्रेणी 1 के उत्तराधिकारी के रूप में पदोन्नत करना है। अब श्रेणी I के उत्तराधिकारियों में बच्चे, विधवा और पिता और माता दोनों शामिल होंगे।

 

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