वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ खुले बद्रीनाथ के द्वार, जयकारों से गूंजा पूरा धाम

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चमोली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में बसे बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते ही पूरा माहौल भक्ति और आस्था से भर गया। गुरुवार सुबह ठीक 6 बजकर 15 मिनट पर जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, वैसे ही ‘बद्री विशाल की जय’ के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा। कपाट खुलने की यह प्रक्रिया पूरी तरह विधि विधान और परंपराओं के अनुसार की गई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ भगवान बद्री विशाल की पूजा-अर्चना की और उसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए। इस खास मौके पर हजारों की संख्या में भक्त वहां मौजूद…

चमोली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में बसे बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते ही पूरा माहौल भक्ति और आस्था से भर गया। गुरुवार सुबह ठीक 6 बजकर 15 मिनट पर जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, वैसे ही ‘बद्री विशाल की जय’ के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा।

कपाट खुलने की यह प्रक्रिया पूरी तरह विधि विधान और परंपराओं के अनुसार की गई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ भगवान बद्री विशाल की पूजा-अर्चना की और उसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए। इस खास मौके पर हजारों की संख्या में भक्त वहां मौजूद थे। कई लोग तो रात से ही कतार में लग गए थे, ताकि सबसे पहले भगवान के दर्शन कर सकें।

जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं की आंखों में खुशी और श्रद्धा साफ झलक रही थी। कोई हाथ जोड़कर खड़ा था, कोई भावुक होकर प्रार्थना कर रहा था, तो कोई इस पल को अपने मोबाइल में कैद करने की कोशिश कर रहा था। हर किसी के चेहरे पर एक अलग ही सुकून और संतोष नजर आ रहा था।

इस दौरान मंदिर परिसर को फूलों से खूबसूरती से सजाया गया था, जिससे उसकी भव्यता और भी बढ़ गई थी। सेना के बैंड ने भी अपनी मधुर धुनों से इस पावन अवसर को और खास बना दिया। पूरे वातावरण में एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस हो रही थी।

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की भी विधिवत शुरुआत हो गई है। इससे पहले केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट भी खोले जा चुके हैं। अब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बन सकेंगे।

हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा पर आते हैं और भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते हैं। माना जाता है कि यहां दर्शन करने से मन को शांति मिलती है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यही वजह है कि इतनी कठिन यात्रा होने के बावजूद लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आती।

–आईएएनएस

पीआईएम/एएस

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