मुंबई, 18 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। इस बीच सीनियर एडवोकेट और पूर्व सांसद मजीद मेमन ने गुरुवार को इन घटनाक्रमों को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी बताया।
मजीद मेमन ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “हमारे लोकतांत्रिक सिस्टम में जो घटनाएं हो रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। पहले ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए दलों को तोड़ा गया और अब ‘ऑपरेशन टाइगर’ जैसे नए नाम सामने आ रहे हैं। भाजपा ने आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस के बाद शिंदे गुट के माध्यम से शिवसेना को तोड़ने का काम किया। अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को तोड़ने की कोशिश चल रही हैं। ऐसा लगता है कि एनडीए के कुछ नेता लोकतांत्रिक भारत को कमजोर करने पर तुल गए हैं। अगर यही सिलसिला जारी रहा तो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी।”
शिवसेना (यूबीटी) में चल रही अंदरूनी खींचतान पर मेमन ने उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं की विश्वसनीयता पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “मैं उद्धव ठाकरे के साथ लंबे समय तक काम कर चुका हूं और कई नेताओं को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। मेरा मानना है कि संजय राउत, उद्धव ठाकरे के प्रति बेहद वफादार हैं और उन्हें कभी नहीं छोड़ेंगे। अरविंद सावंत और अनिल देसाई जैसे नेता भी किसी भी उथल-पुथल के बावजूद उद्धव का साथ नहीं छोड़ेंगे। लेकिन, जो छह सांसद अभी संदेह के घेरे में हैं, उन पर या तो पैसे का लालच काम कर रहा है या फिर उनके खिलाफ फाइलें खोलने की धमकी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में संभावित फूट को लेकर दावों पर मेमन ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “सीएम योगी और प्रधानमंत्री मोदी कभी यह नहीं मानेंगे कि उन्होंने कोई पार्टी तोड़ी है। वे बस यही कहेंगे कि कुछ सांसद या विधायक उनके संपर्क में हैं। हकीकत यह है कि दबाव, डर और धमकियों के जरिए लोगों को तोड़ा जा रहा है। समय बताएगा कि अखिलेश यादव अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट रख पाते हैं या नहीं। अगर यूपी में भी वही पैटर्न दोहराया गया जो आप, टीएमसी और शिवसेना के साथ हुआ, तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा।”
प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया मुलाकात पर मजीद मेमन ने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री की तारीफ कहीं भी होती है, तो यह अच्छी बात है। अमेरिका जैसे बड़े देश द्वारा पीएम मोदी की प्रशंसा करना और यह कहना कि अगर भारत पर हमला हुआ तो हम भारत के साथ खड़े होंगे, यह खुशी की बात है। लेकिन, ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाई गई कुछ पाबंदियों, खासकर रूस से तेल खरीदने को लेकर, उन्हें हटाना चाहिए। यह भारत के हित में होगा।”
पीएम मोदी की यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात का जिक्र करते हुए मेमन ने कहा, “पीएम मोदी अंतरराष्ट्रीय संबंध सुधारने में लगे हैं, यह सराहनीय है। भारत की वैश्विक छवि सुधरे और दूसरे देशों के साथ हमारे संबंध मजबूत हों, इसके लिए शुभकामनाएं हैं। लेकिन एक सवाल उठता है कि भारत के अंदर जो कुछ चल रहा है, उससे पीएम मोदी क्यों मुंह मोड़ रहे हैं? पेपर लीक, बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं पर वे चुप्पी क्यों साधे रखते हैं? विदेश नीति के साथ-साथ घरेलू मुद्दों पर भी उन्हें ध्यान देना चाहिए।”
–आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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