सिर्फ पति UAPA आरोपी होने से पत्नी की संपत्ति अवैध नहीं! झारखंड हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

Summary :

झारखंड हाईकोर्ट ने UAPA मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति के आरोपी होने मात्र से पत्नी की संपत्ति अवैध नहीं हो जाती। कोर्ट ने महिला की स्वतंत्र आय को देखते हुए उसकी कुर्क की गई स्कूटी को रिहा कर दिया।

Jharkhand High Court

Jharkhand High Court : झारखंड हाईकोर्ट ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी आरोपी से पारिवारिक रिश्ता होने के आधार पर रिश्तेदार की जायदाद को आतंकवाद या रंगदारी से जुटाया गया धन नहीं माना जा सकता।

लाइव ला के अनुसार जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच ने एनआईए केस के आरोपी बिनोद कुमार गंझू की पत्नी सुशीला देवी की कुर्क की गई स्कूटी को मुक्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि जब महिला का अपना स्वतंत्र आय स्रोत है और वाहन उसके नाम पर रजिस्टर्ड है, तो उसे सीधे तौर पर अवैध कमाई से जुड़ा नहीं माना जा सकता।

कथित लेवी वसूली से जुड़ा मामला

मामला टंडवा के अमरपाली-मगध कोयला इलाके में प्रतिबंधित संगठन ‘तृतीय प्रस्तुति समिति’ द्वारा कोयला कारोबारियों से कथित लेवी वसूली से जुड़ा है। जनवरी 2016 में पुलिस ने छापेमारी कर बिनोद गंझू के पास से लगभग 91.75 लाख रुपये नकद बरामद किए थे।

जांच एजेंसी का आरोप था कि वह संगठन के लिए पैसे जुटाने और पहुंचाने का काम करता था। इस मामले में जांच के दौरान आरोपी की पत्नी के नाम दर्ज स्कूटी, भाई के नाम दर्ज जेसीबी मशीन और मां के नाम की जमीन पर बने मकान को 2019 में कुर्क कर लिया गया था।

महिला के पास वाहन खरीदने की आर्थिक क्षमता

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सुशीला देवी के वकील ने दलील दी कि वह सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में कार्यरत हैं और उनका मासिक वेतन करीब 82 हजार रुपये है। उन्होंने स्कूटी अपनी कमाई से दिसंबर 2018 में खरीदी थी, जो छापेमारी की घटना के दो साल बाद की बात है।

अदालत ने इन तथ्यों और दस्तावेजों को सही मानते हुए माना कि महिला के पास वाहन खरीदने की आर्थिक क्षमता थी। महज पति के आरोपी होने से पत्नी की संपत्ति को अपराध की कमाई नहीं ठहराया जा सकता।

हालांकि, हाईकोर्ट ने जेसीबी मशीन और दो मंजिला मकान की कुर्की हटाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने पाया कि आरोपी के भाई और मां के पास इतनी महंगी संपत्तियां खरीदने या मकान बनवाने की वैध आय के कोई पुख्ता दस्तावेज मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल संयुक्त परिवार की संपत्ति बता देने भर से काली कमाई से बनी जायदाद वैध नहीं हो जाती। ऐसे में सिर्फ पत्नी की स्कूटी को छोड़कर बाकी संपत्तियों की कुर्की का आदेश बरकरार रहेगा।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।