Jharkhand Protest: JPSC और JSSC में क्या अंतर? जानिए क्यों हो रहा है दोनों को लेकर बवाल

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच JPSC और JSSC की चर्चा तेज हो गई है। दोनों संस्थाओं के नाम मिलते-जुलते होने से कई अभ्यर्थी भ्रमित रहते हैं। हालांकि, दोनों की भूमिका और भर्ती प्रक्रियाएं अलग हैं। आइए जानते हैं JPSC और JSSC के बीच का अंतर और उनकी जिम्मेदारियां।

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार बढ़ता ही जा रहा है। उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, समय पर परीक्षा आयोजित करने और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे हैं। इस दौरान JPSC और JSSC के नाम अक्सर सामने आते हैं। चूंकि ये नाम सुनने में एक जैसे लगते हैं, इसलिए कई उम्मीदवार इनके काम को लेकर दुविधा में फंसे रहते हैं। असल में, दोनों संस्थाएं सरकारी पदों पर कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया में शामिल हैं, लेकिन जिन खास भर्तियों और पदों को वे देखती हैं, वे अलग-अलग हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह जानना बेहद जरुरी है। इसके लिए यह आर्टिकल पढ़ना भी उतना ही जरूरी है जितना आपको इसके बारे में जानना। क्योंकि इस आर्टिकल में दोनों JPSC और JSSC के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।

JPSC क्या है और इसका काम क्या होता है?

बता दें कि झारखंड में पिछले 15 दिनों से छात्रों के प्रोटेस्ट शुरू है। JPSC यानी Jharkhand Public Service Commission (झारखंड लोक सेवा आयोग) यह राज्य की प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं में से एक है। इसका मुख्य काम राज्य सरकार के तहत विभिन्न उच्च-स्तरीय पदों के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित करना है। JPSC परीक्षाओं के माध्यम से अलग-अलग सेवाओं—जिनमें प्रशासनिक सेवा भी शामिल है—के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है। भर्ती प्रक्रिया में आमतौर पर प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार जैसे चरण शामिल होते हैं। हालांकि, किसी भी भर्ती प्रक्रिया के लिए विशिष्ट चरण और पात्रता मानदंड आधिकारिक अधिसूचना द्वारा तय किए जाते हैं। JPSC मुख्य रूप से राज्य में उच्च-स्तरीय सरकारी सेवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएँ आयोजित करने के लिए जानी जाती है।

JPSC से कैसे अलग है JSSC?

JSSC का पूरा नाम झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (Jharkhand Staff Selection Commission) है। यह आयोग राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में विभिन्न अधीनस्थ-स्तर (subordinate-level) के पदों पर कर्मचारियों और कर्मियों की भर्ती के लिए चयन परीक्षाएं आयोजित करता है। JSSC के तहत भर्ती परीक्षाएं और चयन प्रक्रियाएं अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग हो सकती हैं; शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और चयन के मानदंडों से जुड़ी आवश्यकताएं भी एक पद से दूसरे पद के लिए भिन्न हो सकती हैं। इसलिए, उम्मीदवारों को अपनी तैयारी केवल आयोग के नाम के आधार पर नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें विशिष्ट भर्ती प्रक्रिया के लिए आधिकारिक अधिसूचना (official notification) को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

आंदोलन के बीच दोनों आयोग क्यों बने मुद्दा?

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी ने राज्य की पूरी भर्ती प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उम्मीदवार परीक्षा में देरी, नतीजों, प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर अपनी चिंताएं ज़ाहिर कर रहे हैं। ऐसे में, JPSC और JSSC दोनों ही लोगों के बीच र्चा का विषय बन गए हैं। हालांकि, दोनों आयोगों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं। आसान शब्दों में कहें तो, JPSC मुख्य रूप से उच्च-स्तरीय राज्य सेवाओं के लिए उम्मीदवारों के चयन के लिए जिम्मेदार है, जबकि JSSC अलग-अलग विभागों में अधीनस्थ कर्मचारियों के पदों के लिए भर्ती का काम संभालता है। इसलिए, किसी भी परीक्षा या विवाद की जांच करते समय, यह पता लगाना जरूरी है कि संबंधित भर्ती प्रक्रिया के लिए कौन सा आयोग जिम्मेदार है।

Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।