Gulzar Poetries: “आइना देख कर तसल्ली हुई…”-पढ़ें गुलजार जी के दिल छू लेने वाले शेर

Summary :

Gulzar Poetries: ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में, एक पुराना ख़त खोला अनजाने में…

आप के बा’द हर घड़ी हम ने,

आप के साथ ही गुज़ारी है

आइना देख कर तसल्ली हुई,

हम को इस घर में जानता है कोई

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़,

किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

शाम से आँख में नमी सी है,

आज फिर आप की कमी सी है

कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था,

आज की दास्ताँ हमारी है

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में,

एक पुराना ख़त खोला अनजाने में

तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं,

सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं

आदतन तुम ने कर दिए वादे,

आदतन हम ने ए’तिबार किया

शाम से आँख में नमी सी है,

आज फिर आप की कमी सी है

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।