“अब उस की दीद मोहब्बत…” पढ़िए Zafar Iqbal के चुनिंदा शेर

Summary :

यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू न मिला, किसी को हम न मिले और हम को तू न मिला

रास्ते हैं खुले हुए सारे,

फिर भी ये ज़िंदगी रुकी हुई है

 यहाँ किसी को भी कुछ हस्ब-ए-आरज़ू न मिला,
किसी को हम न मिले और हम को तू न मिला

झूट बोला है तो क़ाएम भी रहो उस पर ‘ज़फ़र’.
आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए

कैसा है कौन ये तो नज़र आ सके कहीं,
पर्दा ये दरमियाँ से हटा लेना चाहिए

कहाँ तक हो सका कार-ए-मोहब्बत क्या बताएँ,
तुम्हारे सामने है काम जितना हो रहा है

थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते,
कुछ और थक गया हूँ आराम करते करते

मैं ज़ियादा हूँ बहुत उस के लिए अब तक भी,
और मेरे लिए वो सारे का सारा कम है

अब उस की दीद मोहब्बत नहीं ज़रूरत है,
कि उस से मिल के बिछड़ने की आरज़ू है बहुत

 तुम अपनी मस्ती में आन टकराए मुझ से यक-दम,
इधर से मैं भी तो बे-ध्यानी में जा रहा था

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।