“लम्बी है ग़म की शाम मगर…” पढ़िए ये बेहतरीन शेर

Summary :

उर्दू शायरी के इन चुनिंदा शेरों में मिलेगा दिल को सुकून

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए- बशीर बद्र

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ- अहमद फ़राज़

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है, लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब, आज तुम याद बे-हिसाब आए- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया, वर्ना हम भी आदमी थे काम के- मिर्ज़ा ग़ालिब

न जी भर के देखा न कुछ बात की, बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की- बशीर बद्र

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं, तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख- अल्लामा इक़बाल

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।