Pyare Miyan POCSO Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यौन शोषण के गंभीर मामलों में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 78 वर्षीय पूर्व अखबार संचालक प्यारे मियां को 10 बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिसकी चर्चा चारों और देखने को मिल रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने आरोपी पर 77.64 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आरोप है कि प्यारे मियां नौकरी दिलाने का झांसा देकर लड़कियों को अपने पास बुलाता था और फिर उनका यौन शोषण करता था।
आखिर क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, आरोपी साल 2014 में नाबालिग लड़कियों को 10 हजार रुपये की नौकरी दिलाने का लालच देकर उनका भरोसा जीतता था। इसके बाद वह उनका यौन शोषण करता था। आरोपों के मुताबिक, उसकी सहयोगी राबिया बी भी इस मामले में उसकी मदद करती थी। यह मामला 11 जुलाई 2020 को सामने आया। जानकारी के मुताबिक, एक अभियोजन संबंधी प्रक्रिया के तहत नाबालिग लड़कियों की काउंसलिंग की जा रही थी।
इसी दौरान एक पीड़िता ने अपने साथ हुए यौन शोषण की जानकारी दी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे भोपाल के शाहपुर इलाके में स्थित एक फ्लैट पर जन्मदिन की पार्टी के बहाने बुलाया गया था। वहां उसे कथित तौर पर जबरन शराब पिलाई गई और इसके बाद आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इस खुलासे के बाद अन्य पीड़िताओं ने भी अपने साथ हुए कथित शोषण की जानकारी दी। मामला सामने आने के बाद महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के साथ-साथ नौकरी का लालच देकर किए जाने वाले अपराधों को लेकर गंभीर सवाल उठे।
कोर्ट ने 10 बार आजीवन कारावास की सुनाई सजा
कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को इस मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे मामलों में पीड़िताओं की शिकायत, जांच और न्यायिक प्रक्रिया की अहम भूमिका को मध्य नजर रखते हुए विषश पॉक्सो अदालत ने आरोपी प्यारे मियां को भारतीय दंड साहित्य को ध्यान में रखते हुए कई धाराओं में दोषी करार करते हुए सजा सुनाई। उसेय आठ मामलों में मौत और उम्रकैद की सजा सुनाई, जो की एक साथ चलेंगी।
जिसके बाद सरकारी वकील पीएन सिंह राजपूत ने बताया कि पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया था।जिसके बाद उसके सहयोगी राबिया बी और अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमा चलाया गया। रोप साबित होने के बाद आरोपी को 10 बार उम्रकैद की सजा सुनाई। उन्होंने ये भी कहा कि नौकरी के अवसर तलाश रहे लोगों को किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। नौकरी के नाम पर संदिग्ध प्रस्ताव मिलने पर परिवार, पुलिस या संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेना जरूरी है।
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