जीएसटी में फंसे उद्योगों के करोड़ों रुपए

Summary :

यानि सिडकुल की अनेक फैक्ट्रियों को 2020 तक औद्योगिक पैकेज की छूट का लाभ मिलना था। 2017 में जीएसटी लागू हुआ तो उसमें छूट का कोई प्रावधान नहीं था।

रुद्रपुर : औद्योगिक विकास के लिए उत्तराखंड में उद्योगों के लिए 2020 तक मिली कर में छूट का लाभ उद्योगों को नहीं मिल पा रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद उद्योगों से जीएसटी जमा कराया जा रहा है, लेकिन रिफंड नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण उद्योगों का करोड़ों रुपये सरकार के पास फंसा है।

यह मामला पिछले दिनों वित्त मंत्री प्रकाश पंत के सामने भी उठा था, लेकिन उन्होंने केंद्र सरकार के पाले में डाल कर समाधान करने में असमर्थता जता दी थी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को औद्योगिक विकास के लिए पैकेज दिया था, जिसमें 2020 तक उद्योगों को करों में छूट दी गई थी।

यानि सिडकुल की अनेक फैक्ट्रियों को 2020 तक औद्योगिक पैकेज की छूट का लाभ मिलना था। 2017 में जीएसटी लागू हुआ तो उसमें छूट का कोई प्रावधान नहीं था। लिहाजा फैक्ट्रियों से तिमाही कर वसूला जाने लगा। उदाहरण के तौर पर जिस उत्पाद तक 18 फीसदी जीएसटी है, उसमें फैक्ट्री को 18 फीसदी जमा करना है और सरकार ने 17 फीसदी वापस करना है।

सिर्फ एक फीसदी सीएसटी कंपनियों को देना है। सूत्रों का कहना है कि अब तक फैक्ट्रियां चार तिमाही जीएसटी रिटर्न दाखिल कर चुकी हैं, लेकिन जो 17 फीसदी कर की धनराशि उन्हें रिफंड होनी है उसमें मात्र एक तिमाही का रिफंड आया है, जबकि चार तिमाही की रिपोर्ट जा चुकी है। इसमें फैक्ट्रियों ने केंद्र, प्रदेश व सीए की आडिट रिपोर्ट भी समिट कर दी है। यानि तीन तिमाही की धनराशि लटकी हुई है।

छोटी फैक्ट्रियों का जितना लाभांश होता है उसके करीब की धनराशि जीएसटी में अटकी हुई है। फैक्ट्रियां रिफंड आने का इंतजार कर रही हैं, मगर रिफंड प्राप्त नहीं हो रहा है जिससे फैक्ट्रियां आर्थिक संकट से जूझ रही हैं।

– सुरेंद्र तनेजा

Desk Team