Himachal Pradesh News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने ग्रामीण भारत के विकास के लिए एक नई और दूरदर्शी व्यवस्था लागू की है। संसद के शीतकालीन सत्र में पारित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) – वीबी–जी राम जी अधिनियम, 2025 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार को स्थायी विकास से जोड़ना है।
Himachal Pradesh News: प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में हुई विस्तृत चर्चा
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित वीबी–जी राम जी योजना पर प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने की। इस अवसर पर उन्होंने योजना की विशेषताओं और इसके दीर्घकालिक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

Himachal Pradesh News Today: रोजगार से आगे बढ़कर समग्र ग्रामीण विकास
रेखा वर्मा ने कहा कि वीबी–जी राम जी योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास का एक मजबूत और परिणाम देने वाला मॉडल है। इस योजना के माध्यम से गांवों में आधारभूत ढांचे का विकास होगा, आजीविका के नए साधन बनेंगे और लोगों को अपने ही गांव में रोजगार मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर होने वाला पलायन भी रुकेगा।
पुराने प्रयासों से सीखकर बनाई गई नई योजना
उन्होंने बताया कि आज़ादी के बाद से कई सरकारों ने ग्रामीण रोजगार के लिए योजनाएं चलाईं। 1960–61 के रूरल मैनपावर प्रोग्राम से लेकर 2005 में शुरू हुई मनरेगा तक कई प्रयास हुए। मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, लेकिन समय के साथ इसमें कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आईं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वीबी–जी राम जी अधिनियम लागू किया है।

125 दिन की कानूनी रोजगार गारंटी
नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन की कानूनी रोजगार गारंटी दी गई है। रोजगार को गांव की विकास परियोजनाओं से जोड़ा गया है। ग्राम सभा स्तर पर विकास योजना बनेगी, जो ब्लॉक और जिला स्तर से होते हुए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जुड़ेगी। इसी योजना के क्रियान्वयन से रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
तकनीक आधारित और पारदर्शी व्यवस्था
रेखा वर्मा ने कहा कि यह योजना पूरी तरह तकनीक पर आधारित है। इसमें बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल निगरानी प्रणाली, हर छह महीने में समीक्षा और समय पर भुगतान की व्यवस्था की गई है। यदि किसी कारण से रोजगार या भुगतान में देरी होती है, तो लाभार्थी को मुआवजा देने का भी प्रावधान है।
उन्होंने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 90:10 का फंडिंग अनुपात तय किया गया है, जो प्रदेश के लिए बहुत लाभकारी है। अन्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 रखा गया है। रेखा वर्मा ने बताया कि यूपीए सरकार के समय ग्रामीण रोजगार योजनाओं में सीमित निवेश हुआ था, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में निवेश और परिसंपत्ति निर्माण कई गुना बढ़ा है। हिमाचल प्रदेश में भी रोजगार सृजन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

विकसित भारत 2047 की मजबूत नींव
उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना का फोकस ग्रामीण ढांचा, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आजीविका पर है। यह योजना किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बनाई गई है। भाजपा इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी।
रिपोर्ट: विक्रांत सूद
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