कुलदीप सिंह पठानिया का संदेश! सामंजस्य और सहयोग से मजबूत होती है विधानसभा

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Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश विधान सभा के बजट सत्र (चरण-2) के सातवें दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले एक विशेष अवसर देखने को मिला। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी घण्डल, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग और ऑकलैंड हाउस स्कूल, लक्कड़ बाजार शिमला के लगभग 150 छात्र-छात्राओं ने विधान सभा का दौरा किया। सदन की कार्यवाही देखने से पहले इन विद्यार्थियों ने विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से काउंसिल चैम्बर के गेट नंबर-1 पर मुलाकात की।

Himachal Pradesh News: छात्रों के सवालों के दिए विस्तार से जवाब

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इस दौरान छात्रों ने विधानसभा की कार्यप्रणाली, स्पीकर की भूमिका, सदन का गठन और मंत्रिपरिषद के गठन से जुड़े कई सवाल पूछे। अध्यक्ष पठानिया ने सभी प्रश्नों का सरल और क्रमबद्ध तरीके से उत्तर दिया। उन्होंने छात्रों को लोकतांत्रिक व्यवस्था के हर पहलू को समझाने का प्रयास किया ताकि वे भविष्य में बेहतर नागरिक बन सकें।

भारतीय संसदीय व्यवस्था की जानकारी

संवाद के दौरान उन्होंने बताया कि भारत की संसदीय प्रणाली संघीय ढांचे पर आधारित है। देश में केंद्र और राज्य स्तर पर अलग-अलग व्यवस्थाएं काम करती हैं। केंद्र में संसद होती है, जिसमें राज्यसभा (उच्च सदन) और लोकसभा (निचला सदन) शामिल हैं। वहीं राज्यों में विधान सभा होती है और कुछ बड़े राज्यों में विधान परिषद का भी प्रावधान होता है।

स्पीकर की भूमिका और जिम्मेदारी

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पठानिया ने कहा कि वे वर्तमान में चौदहवीं विधान सभा के सर्वसम्मति से चुने गए अध्यक्ष हैं। उनका मुख्य काम सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना होता है। इसके लिए वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का सहयोग लेते हैं, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा के बिना सदन का संचालन हो सके। उन्होंने कहा कि सदन में सौहार्द, सामंजस्य और सहयोग बहुत जरूरी है।

युवाओं को दी प्रेरणा

कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे भविष्य के वकील और न्यायाधीश हैं। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने छात्रों को ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा दी।

स्वतंत्रता संग्राम और वकीलों की भूमिका

उन्होंने यह भी बताया कि देश की आजादी में कई बड़े नेताओं का योगदान रहा, जिनमें अधिकतर पेशे से वकील थे। मोतीलाल नेहरू, विठ्ठलभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महान नेताओं ने देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सदन की परंपरा और गरिमा

पठानिया ने कहा कि हमारे विधान मंडल की हमेशा से एक उच्च परंपरा और गरिमा रही है। इसे बनाए रखने में पहले नेताओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बताया कि विठ्ठलभाई पटेल ने राष्ट्रीय असेंबली के पहले निर्वाचित अध्यक्ष के रूप में इस परंपरा को स्थापित करने का प्रयास किया था।

मजबूत लोकतंत्र की ओर कदम

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि आज के युवा और छात्र जिस तरह से विधान सभा की कार्यवाही में रुचि दिखा रहे हैं, यह लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे देश का भविष्य और अधिक मजबूत और उज्ज्वल होगा।

अंत में शुभकामनाएं

कार्यक्रम के अंत में कुलदीप सिंह पठानिया ने सभी छात्रों को शुभकामनाएं दीं और उन्हें सदन की कार्यवाही देखने के लिए आमंत्रित किया। यह अनुभव छात्रों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि उन्हें लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को समझने का एक अनूठा अवसर भी मिला।

रिपोर्ट: विक्रांत सूद 

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