किसी भी कंप्यूटर की निगरानी करने का अधिकार 10 केंद्रीय एजेंसियों को देने के केंद्र सरकार के कदम पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल उठाते हुए शुक्रवार को इस विषय पर लोगों की राय मांगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ‘पूर्ण निगरानी’ कानून सम्मत नहीं है।
उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मुझे पता चला है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कल एक आदेश जारी कर 10 केंद्रीय एजेंसियों को कंप्यूटर पर किसी भी सृजित, प्रेषित, प्राप्त या भंडारित सूचना को देखने, उनकी निगरानी करने और ‘डिक्रिप्शन’ करने के लिए अधिकृत किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए है, तब भी उसके लिए केंद्र सरकार के पास पहले से ही तंत्र है।
लेकिन सभी आम लोग क्यों प्रभावित हो? लोग अपनी राय दें…।’’ गौरतलब है कि गृह मंत्रालय के इस कदम की विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है। गौरतलब है की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रमुख 10 सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति या संस्थान के कंप्यूटर के डेटा को जांचने का अधिकार दिया है।
गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक देश की ये सुरक्षा एजेंसियां किसी भी व्यक्ति के कंप्यूटर में जेनरेट, ट्रांसमिट, रिसीव और स्टोर किए गए किसी दस्तावेज को देख सकता है। इस आदेश के अनुसार सभी सब्सक्राइबर या सर्विस प्रोवाइडर और कंप्यूटर के मालिक को जांच एजेंसियों को तकनीकी सहयोग देना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें 7 साल की सज़ा देने के साथ जुर्माना लगाया लगाया जा सकता है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स, डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआई, एनआईए, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट (रॉ), डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस और दिल्ली के कमिश्नर ऑफ पुलिस को देश में चलने वाले सभी कंप्यूटर की जासूसी की मंजूरी दी गई है।


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