मणिपुर में 3 मई को भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 600 से अधिक लोग घायल हो गए हैं, जबकि हजारों घर और अन्य संपत्तियां नष्ट हो गई हैं। विपक्ष के भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) के 21 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा’ करार दिया और कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी इस मुद्दे पर उनकी निर्लज्ज उदासीनता को दर्शाती है। विपक्षी गठबंधन का संसदीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार को मणिपुर के दो दिवसीय दौरे पर आया था। सांसदों ने पहले दिन चुराचांदपुर, बिष्णुपुर और इम्फाल पश्चिम जिलों में राहत शिविरों का दौरा किया और प्रभावित लोगों से बातचीत की। रविवार को प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा। राजभवन ने एक ट्वीट में कहा, “राज्यपाल ने टीम का स्वागत किया और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की पुरानी परंपरा की यथास्थिति बनाए रखने के लिए दोनों समुदायों के सीएसओ के प्रतिनिधियों के साथ शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से शांति बहाल करने के लिए अपना पूरा सहयोग देने की अपील की।” राज्यपाल से मुलाकात के बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राज्यपाल ने खुद दु:ख और पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान, हमने जो कुछ भी देखा, जो भी अनुभव प्राप्त किया, वह हमारी बातों पर सहमत हुई। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हमें मिलकर सभी समुदायों के नेताओं से बातचीत करनी चाहिए और समाधान निकालना चाहिए।”
दु्:खों की कहानियां सुनकर बहुत हैरान और व्यथित हैं
चौधरी ने कहा, राज्यपाल ने यह भी सुझाव दिया कि विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों को मिलकर मणिपुर में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहिए और सभी समुदायों के नेताओं से बात करनी चाहिए जो लोगों के बीच अविश्वास की भावना को हल करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने मणिपुर संकट को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी बताया। राज्यपाल को दिए ज्ञापन में सांसदों ने कहा़ “हम वास्तव में, झड़प की शुरुआत के बाद से दोनों पक्षों द्वारा की गई अभूतपूर्व हिंसा से प्रभावित व्यक्तियों की चिंताओं, अनिश्चितताओं, दर्द और दु्:खों की कहानियां सुनकर बहुत हैरान और व्यथित हैं।”
दु्:खों की कहानियां सुनकर बहुत हैरान और व्यथित हैं
चौधरी ने कहा, राज्यपाल ने यह भी सुझाव दिया कि विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों को मिलकर मणिपुर में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहिए और सभी समुदायों के नेताओं से बात करनी चाहिए जो लोगों के बीच अविश्वास की भावना को हल करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने मणिपुर संकट को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी बताया। राज्यपाल को दिए ज्ञापन में सांसदों ने कहा़ “हम वास्तव में, झड़प की शुरुआत के बाद से दोनों पक्षों द्वारा की गई अभूतपूर्व हिंसा से प्रभावित व्यक्तियों की चिंताओं, अनिश्चितताओं, दर्द और दु्:खों की कहानियां सुनकर बहुत हैरान और व्यथित हैं।”


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