Priyanka Gandhi Assam Visit : प्रियंका गांधी गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंच रही हैं, जहां वे स्क्रीनिंग कमेटी और राज्य के दिग्गज नेताओं के साथ इस ‘पायलट प्रोजेक्ट’ की समीक्षा करेंगी.
बता दें 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव अप्रैल मध्य से मई के पहले हफ्ते के बीच होंगे. अलग-अलग राज्यों में मतदान एक से तीन चरणों में आयोजित किया जा सकता है. पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा का कार्यकाल मई और जून में अलग-अलग तारीखों को समाप्त हो रहा है.
ऐसे में प्रियंका असम का दौरा अहम माना जा रहा है खासकर तब जब राज्य में कांग्रेस के नेताओं के बीच उथल पुथल मची हुई है।
इसे असम विधानसभा चुनाव की आहट के साथ कांग्रेस आलाकमान की रणनीति में बदलाव कहा जा सकता है. खबर है कि कांग्रेस महासचिव और स्क्रीनिंग कमेटी की प्रमुख प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीदवारों के चयन के लिए एक ‘नया सिस्टम’ लागू किया है. इस नए प्रयोग के तहत अब टिकटों का फैसला दिल्ली के बंद कमरों में नहीं, बल्कि असम के जिलों की जमीन नापकर किया जाएगा.
Priyanka Gandhi Assam Visit : क्या है‘पायलट प्रोजेक्ट’?
आमतौर पर किसी भी राज्य में चुनाव के दौरान स्क्रीनिंग कमेटी दिल्ली में बैठकर राज्य चुनाव समिति (SEC) के साथ चर्चा करती है. वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया जाता है और नामों पर मुहर लगती है. लेकिन प्रियंका गांधी ने इस परंपरा को तोड़ दिया है. उन्होंने कमेटी के तीन सदस्यों—सांसद सप्तगिरी शंकर उलका, इमरान मसूद और वरिष्ठ नेता सिरिवेला प्रसाद को जिम्मेदारी दी है कि वे खुद जिलों में जाकर फीडबैक लें.
हालिया उथल पुथल को देखते रखा है खास ध्यान

बता दें, हाल में असम से नेताओं के इस्तीफे ने पार्टी में हड़कंप मचा दिया था। दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस, जो कि पहले ही राज्य में बैकफुट पर थी उसे और पीछे धकेलने का काम किया था। जैसे तैसे मामले को संभाल तो लिया गया मगर आगे और स्थिति न बिगड़े इसे लेकर पार्टी आलाकमान ने इसकी जिम्मेदारी प्रियंका को दे दी है।
Congress Priyanka Gandhi in Assam : क्या है सोशल इंजीनियरिंग

उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के लिए प्रियंका गांधी ने जिलों का बंटवारा बड़ी चतुराई से ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के आधार पर किया है.
इमरान मसूद: उन्हें उन जिलों (डिब्रूगढ़, धेमाजी, तिनसुकिया आदि) की जिम्मेदारी दी गई है जहां मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका में है.
सप्तगिरी शंकर उलका: खुद आदिवासी नेता होने के नाते उन्हें माजुली, जोरहात और कारबी आंगलोंग जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में भेजा गया है.
सिरिवेला प्रसाद: वे चराइदेव, शिवसागर और लखीमपुर जैसे जिलों में उम्मीदवारों की तलाश कर रहे हैं.
यह रणनीति बताती है कि कांग्रेस इस बार जमीनी समीकरणों और जातीय गणित को लेकर कितनी गंभीर है.
Priyanka Gandhi News : कैसे बदलेगी समीकरण

बता दें 2021 के विधानसभा चुनाव में 126 सीटों वाले असम में कांग्रेस ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन पार्टी को केवल 29 सीटें मिल पाईं. दूसरी ओर, बीजेपी ने 93 में से 60 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी थी. उस दौरान माना जा रहा था कि राज्य में कांग्रेस सरकार बना लेगी मगर चुनावी नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए। प्रियंका गांधी का यह नया सिस्टम इसी खाई को पाटने की एक कोशिश है।
एक खबर के अनुसार सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने बताया कि वे हर जिले में जाकर न केवल कार्यकर्ताओं से बल्कि आम जनता से भी ‘वन-टू-वन’ मीटिंग कर रहे हैं ताकि सबसे मजबूत और जिताऊ चेहरे को मैदान में उतारा जा सके.


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