सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजीत पवार और 70 से अधिक अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने से सोमवार को इनकार करते हुए कहा कि जांच को रोका नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह की एक पीठ ने बंबई उच्च न्यायालय के 22 अगस्त को दिए गए आदेश के खिलाफ कुछ आरोपियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी। उच्च न्यायालय के आदेश के एक दिन बाद ही मुम्बई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने घोटाले के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की थी।
पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह घोटाला बहुत बड़ा है और इसकी जांच को रोका नहीं जा सकता। याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि जांच उच्च न्यायालय के आदेश और अवलोकन में निर्बाध रूप से आगे बढ़ेगी।


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