सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार से कहा कि बीजेपी को उसके ‘‘गणतंत्र बचाओ यात्रा’’ कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित जनसभायें और रैलियां आयोजित करने की अनुमति दी जाए। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई से कहा कि वह अपनी प्रस्तावित ‘रथ यात्रा’ का परिवर्तित कार्यक्रम अधिकारियों को दे और उनसे आवश्यक मंजूरी प्राप्त करे।
पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह संविधान में प्रदत्त बोलने और अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को ध्यान में रखते हुए रथ यात्रा के लिए बीजेपी के परिवर्तित कार्यक्रम पर विचार करे। पीठ ने कहा कि जहां तक संभावित कानून व्यवस्था की स्थिति के प्रति राज्य सरकार की आशंका का संबंध है तो उसे ‘निराधार’ नहीं कहा जा सकता और बीजेपी को तर्कसंगत तरीके से इन आशंकाओं को दूर करने के लिए सभी संभव कदम उठाने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा आयोजित करने के लिए बीजेपी की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था। बीजेपी की राज्य इकाई ने कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ के 21 दिसंबर, 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने उसकी रथ यात्रा को अनुमति देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को निरस्त कर दिया था।
इस मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि बीजेपी ने अब अपना ‘‘गणतंत्र बचाओ यात्रा’’ कार्यक्रम 40 दिन से घटाकर 20 दिन कर दिया है और अब उसकी ‘‘यात्रायें’’ मुर्शीदाबाद में बहरामपुर, दक्षिण 24 परगना जिले में डायमंड हार्बर, मेदिनीपुर और कोलकाता उत्तर संसदीय क्षेत्र से शुरू होंगी। इस वकील ने बताया कि स्कूलों की आगामी परीक्षाओं और आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
इससे पहले, बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में रैली निकालने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस आयोजन के माध्यम से राज्य के 42 संसदीय क्षेत्रों में सभायें आयोजित की जानी थीं। बीजेपी का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से यात्रायें आयोजित करना उसका मौलिक अधिकार है जिससे उसे वंचित नहीं किया जा सकता।
बीजेपी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार बार बार नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला कर रही है जिसकी वजह से राज्य सरकार की गतिविधियों को चुनौती देते हुए अलग अलग याचिकायें दायर की गयी हैं। बीजेपी ने दावा किया था कि पहले भी कई बार अंतिम क्षणों में उसे अनुमति देने से इंकार किया जा चुका है। बीजेपी का आरोप है कि 2014 से ही राज्य में पार्टी राजनीतिक प्रतिशोध का सामना कर रही है।


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