उत्तरकाशी से हरिद्वार तक गंगा में डाला जा रहा कूड, नमामि गंगा प्रोजेक्टर पर खुले कई राज

Summary :

करोड़ों-अरबों खर्च करने के बाद भी गंगा मैली की मैली है। तमाम कोशिशों व वायदों के मद्देनजर गंगा की स्वच्छता व निर्मलता धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है।

हरिद्वार, संजय (पंजाब केसरी): करोड़ों-अरबों खर्च करने के बाद भी गंगा मैली की मैली है। तमाम कोशिशों व वायदों के मद्देनजर गंगा की स्वच्छता व निर्मलता धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। वहीं, नमामि गंगा प्रोजेक्ट के तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों में साफ-सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसमें सुधार नहीं हो पा रहा है। उत्तरकाशी, जोशीमठ से लेकर हरिद्वार तक गंगा और उसकी सहायक नदियों में कूड़ा डाला जा रहा है। नदियों के किनारे बसे शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था न होने के कारण ये कूड़ा नदियों में जा रहा है। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है।
श्रीनगर में अलकनंदा में जा रही गंदगी
श्रीनगर में अलकनंदा नदी किनारे बस अड्डे के पास कूड़ा डाला जा रहा है। यहां नगर निगम ने कूड़ा कलेक्शन सेंटर बनाया है। अलकनंदा नदी किनारे कलेक्शन सेंटर से कूड़े से प्लास्टिक, लोहे आदि की छंटाई कर यहां से ट्रेचिंग ग्राउंड में लाया जा रहा है। नदी किनारे कलेक्शन सेंटर बनाने से कूड़ा बिखरा हुआ है। कूड़े से रिसने वाला गंदा पानी सीधे अलकनंदा में जा रहा है। नालों का गंदा पानी भी अलकनंदा स जा रहा है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा, मंदाकिनी नदी किनारे डंपिंग ग्राउंड बनाया गया है। अलकनंदा नदी पर खांकरा में और मंदाकिनी नदी पर केदारघाटी की ओर कुंड के पास डपिंग ग्राउंड बनाया गया है। नदियों की स्वच्छता और सुरक्षा के प्रति ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। एक ओर नदी किनारे बनाए गए स्नान घाट कूड़ा करकट जमा होने के केंद्र बन रहे हैं। वहीं शहरों को छोड़कर इससे दूर वाले स्थानों में भी चोरी-छुपे कूड़ा डाला जा रहा है। यात्रा सीजन के दौरान नदियों के किनारे गंदगी के ढेर अलग से लग जाते हैं।
यात्रा के दौरान अलकनंदा में ही जाता है कूड़ा
बदरीनाथ धाम में इपिंग स्पाट बनाए गए हैं, लेकिन यात्रा काल में हर दिन कई टन कूड़ा अलकनंदा नदी में ही जा रहा है। पूर्व में बने एक डम्पिंग कहा पर पर ताले लगे हुए हैं। पोखरी में बने डंपिंग जोन का कूड़ा भी बह कर नदी में जा रहा है। यहां कोई रिटेनिंग बॉल नहीं बनी है। कर्णप्रयाग में भी गोचर मार्ग के पास डम्पिंग जोन तो बना है, लेकिन यहां भी डम्पिंग जोन के नीचे सुरक्षा दीवार नहीं है। इससे बरसात या अधिक कूड़ा होने पर वह नदी में चला जाता है। एसटीपी न होने से भी दिक्कत हो रही है। 
भागीरथी किनारे कूड़ा डेप
उत्तरकाशी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट न होने से भागीरथी नदी किनारे ही कचरे के ढेर लगे हैं। उत्तरकाशी नगरपालिका बाड़ाहाट क्षेत्र में जोशियाड़ा, तांबाखाणी में भागीरथी नदी के किनारे कूड़ा डंप हो रहा है।वहीं, नई टिहरी में खांडखाला मोकरी में नई टिहरी व चंबा का कूड़ा डंपिंग जोन बना है। जो टिहरी झील के पास है। घनसाली तहसील में भिलंगना नदी के सौ मीटर ऊपर घनसाली और चमियाला नगर पंचायत का कूड़ा डाला जा रहा है।
गंगनहर किनारे कूड़ा डाल फैला रहे गंदगी
गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। विभिन्न सामाजिक संस्थाएं गंगा की स्वच्छता के लिए अभियान चलाती हैं। बावजूद इसके स्थानीय लोग गंगा के किनारे कूड़ा डालकर गंदगी और प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। ज्वालापुर में पुल जटवाड़ा से लेकर लालपुल तक कई स्थानों पर गंगनहर के किनारे कूड़ा डाला जा रहा है। गंगनहर के किनारे बसी बड़ी संख्या में आबादी अपना कूड़ा गंगनहर के किनारे फेंक देती है। इस कारण गंगनहर में प्रदूषण बढ़ता है। गंगनहर के किनारे कूड़े का अंबार लगा रहता है। वहीं, जिम्मेदार अधिकारी अपने कार्यालयों में बैठकर गंगा की सफाई का दम भरते हैं। जमीनी स्तर पर निगरानी न होने की वजह से लोग धड़ल्ले से गंग नहर के किनारे कूड़ा फेंक देते हैं। लालपुल के किनारे बड़ी मात्रा में कूड़ा डंप किया जा रहा है, कूड़े से दुर्गंध आती है। इस कारण गंग नहर में प्रदूषण बढ़ता है। क्षेत्र में गंगनहर के किनारे कई स्थानों पर स्थानीय लोगों द्वारा पशु पालन किया जा रहा है। वहीं, लालपुल से डामकोठी तक भी कई स्थानों पर गंगनहर के किनारे कूड़ा फेंका जा रहा है। इस सम्बन्ध में सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश सिंह का कहना है कि गंगा किनारे कूड़ा डालने का मामला संज्ञान में आया है। नगर निगम और पुलिस को पत्र जारी कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हरिद्वार में गंगा किनारे लगे गंदगी के ढेर
ज्वालापुर में पुल जटवाड़ा से लेकर लालपुल तक कई स्थानों पर गंग नहर के किनारे कूड़ा डाला जा रहा है। गंग नहर के किनारे बसी आबादी का कूड़ा गंग नहर के किनारे ही फेंका जा रहा है। इससे गंग नहर में प्रदूषण बढ़ रहा है। लालपुल के किनारे भी कूड़ा डंप किया जा रहा है। गंग नहर किनारे कई स्थानों पर पशु पालन किया जा रहा है। पशुओं का गोबर भी गंग नहर में ही डाला जा रहा है। क्षेत्र के मोहल्ला कस्साबान में ट्रीटमेंट प्लांट होने के बाद भी छोटी नालियों से गंदगी गंग नहर में जा रही है।

Desk Team