’31 मार्च तक दें बंगाल के कर्मचारियों को बकाया 25% DA’, Supreme Court का ममता सरकार को बड़ा आदेश

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Supreme Court on West Bengal DA: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारी कानूनी पे नियमों के तहत महंगाई भत्ता (डीए) पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने इसे कर्मचारियों का कानूनी अधिकार बताते हुए राज्य सरकार को 2008 से 2019 के बीच का बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया। एक बाइंडिंग पेमेंट शेड्यूल को फाइनल करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाते हुए, जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने 2022 के कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से बरकरार रखा, जिसने राज्य सरकार के कर्मचारियों के पक्ष में फैसला…

Supreme Court on West Bengal DA: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारी कानूनी पे नियमों के तहत महंगाई भत्ता (डीए) पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने इसे कर्मचारियों का कानूनी अधिकार बताते हुए राज्य सरकार को 2008 से 2019 के बीच का बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया। एक बाइंडिंग पेमेंट शेड्यूल को फाइनल करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाते हुए, जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने 2022 के कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से बरकरार रखा, जिसने राज्य सरकार के कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था और सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों के बराबर डीए के भुगतान करने का निर्देश दिया था।

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पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर अपीलों पर फैसला सुनाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब पश्चिम बंगाल सर्विसेज (वेतन और भत्ते का संशोधन) नियम, 2009 (आरओपीए) में ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (एआईसीपीआई) से जोड़कर डीए को परिभाषित किया गया है, तो राज्य सरकार बाद के ऑफिस मेमोरेंडम के माध्यम से इसकी गणना के तरीके को नहीं बदल सकती है।

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जस्टिस करोल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि महंगाई भत्ता प्राप्त करना एक कानूनी रूप से लागू करने योग्य तथ्य है जो पश्चिम बंगाल राज्य के कर्मचारियों के पक्ष में मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि आरओपीए नियमों में शामिल एआईसीपीआई, डीए तय करने के लिए पालन किया जाने वाला स्टैंडर्ड था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि कर्मचारी सिर्फ इसलिए साल में दो बार डीए पाने के हकदार नहीं हैं क्योंकि सेंट्रल गवर्नमेंट ऐसे पैटर्न का पालन करती है। इस तर्क को खारिज करते हुए कि राज्य सरकार की वित्तीय मजबूरियां डीए से इनकार को सही ठहरा सकती हैं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजकोषीय नीति अर्जित कानूनी अधिकारों को खत्म नहीं कर सकती है।

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जस्टिस करोल की बेंच ने कहा कि एक बार जब किसी व्यक्ति को कोई अधिकार मिल जाता है, तो राजकोषीय नीति ऐसे अधिकारों के वितरण में बाधा नहीं बन सकती। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि कर्मचारियों को 2008 से 2019 तक डीए का बकाया मिलेगा और यह साफ किया कि अंतरिम आदेशों या इस फैसले के तहत भुगतान की गई कोई भी रकम वापस नहीं ली जाएगी, भले ही बाद में कानून में कोई बदलाव हो जाए। इसने अपने निर्देशों को लागू करने और कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों को राज्य सरकार की वित्तीय स्वायत्तता के साथ संतुलित करने के लिए एक समिति का गठन किया।

Supreme Court on West Bengal DA: जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में SC कमेटी

समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​करेंगी और इसमें झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, पूर्व जज गौतम भिदुरी और भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक या सीएजी द्वारा नामित एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति को राज्य सरकार के साथ सलाह करके देय कुल राशि तय करने और चरणबद्ध भुगतान कार्यक्रम तय करने का काम सौंपा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह काम 6 मार्च, 2026 तक पूरा हो जाना चाहिए, जिसमें पहली किस्त 31 मार्च, 2026 तक जारी की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को समिति को पूरा लॉजिस्टिकल सहयोग देने और सभी संबंधित खर्चों को वहन करने का भी निर्देश दिया। समिति पहली किस्त के भुगतान के बाद एक अंतिम स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसमें भुगतान कार्यक्रम और अनुपालन की स्थिति का विवरण होगा।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।