तमिल लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रपंचन का 83 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को पुडुचेरी में निधन हो गया। पुडुचेरी में जन्मे प्रपंचन (एस. वैद्यलिंगम) कैंसर से पीड़ित थे। उन्होंने तमिलनाडु के तंजावुर में बतौर तमिल शिक्षक अपने करियर की शुरुआत की थी। उनके ऐतिहासिक उपन्यास ‘वानम वसापादम’ को 1995 में प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था।
द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने प्रपंचन के निधन पर अपने शोक संदेश में कहा, ‘उनके निधन से तमिल साहित्य जगत की भारी क्षति पहुंची है।’ स्टालिन ने कहा कि प्रपंचन द्रविड़ आंदोलन के प्रति मित्रवत थे। पीएमके के संस्थापक एस. रामदॉस ने अपने शोक संदेश में कहा कि प्रपंचन ने अपनी अद्भुत शैली के साथ तमिल साहित्य जगत में ख्याति अर्जित की थी। रामदॉस ने कहा कि प्रपंचन ने देश के प्रति महत्वपूर्ण योगदान दिया और उन्होंने तमिल उपग्रह चैनल मक्कल टीवी के लिए भी योजनाएं तैयार की थीं।


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