Thiruparankundram Deep Lighting Case: अगले साल यानी 2026 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले राज्य की सियासत का एक गर्मागर्म मुद्दा उजागर हुआ है। एक बार फिर ऐसा मुद्दा उजागर हुआ है, जिसकी जड़े आपको सैकड़ों साल पीछे ले जाती है। ये मुद्दा धार्मिक है, इसमें हिंदू-मुस्लिम का एंगल है। तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलन का मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है।
मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान उस पत्थर के स्तंभ यानी दीपथून को लेकर सामने आए तीन अलग-अलग दावों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने साफ कहा कि जब एक ही संरचना को लेकर अलग-अलग पक्ष द्वारा अलग-अलग दावे कर रहे हैं, तो स्थिति और अधिक स्पष्ट होना जरूरी। आज इस मामले में फिर से सुनवाई होगी।
यह टिप्पणी जस्टिस जी जयचंद्रन ने उस समय की, जब 1 दिसंबर को एकल पीठ द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई चल रही थी। एकल पीठ ने 3 दिसंबर को दरगाह के पास स्थित तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगै दीपम जलाने की अनुमति दी थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी।
Thiruparankundram Pillar Controversy: दीपथून को लेकर तीन अलग-अलग दलीलें

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दीपथून को लेकर तीन अलग-अलग दावे आए। जस्टिस जयचंद्रन ने कहा कि पहले सरकार ने इसे सर्वे स्टोन (सर्वे पत्थर) बताया, फिर इसे जैन संरचना कहा गया, और अब तीसरा दावा यह है कि यह वक्फ संपत्ति का हिस्सा है। अदालत ने कहा कि इन सभी दावों के बीच सच्चाई तक पहुंचने के लिए पूरी तरह से गहराई से जांच जरूरी है।
Madras High Court: दीपथून पर हिंदू पक्ष और वक्फ बोर्ड की दलीलें

तमिलनाडु हाई कोर्ट में वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता अब्दुल मुबीन ने कहा कि मस्जिद और उसके आसपास का पूरा इलाका वक्फ के अधिकार में आता है, और दीपथून भी उसी का हिस्सा है। उन्होंने 1920 के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि पहाड़ियों तक जाने वाली सीढ़ियां और मंडपम भी मस्जिद के अंतर्गत आते हैं। वहीं, हिंदू श्रद्धालुओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस श्रीराम ने कहा कि यह पहला मामला है, जिसमें एकल पीठ के आदेश को संविधान की शपथ के खिलाफ बताया गया है।
Thiruparankundram Deep Lighting Case: : कोर्ट में हंगामा

सुनवाई के दौरान कोर्ट में तनाव की स्थिति बन गई, जब एक वकील ने अदालत के मना करने के बावजूद जोर-जोर से बोलना जारी रखा। इस पर जस्टिस जयचंद्रन और जस्टिस केके रामकृष्णन ने कड़ी नाराजगी जताई और सीआईएसएफ कर्मियों को बुलाकर उस वकील को कोर्ट से बाहर करवा दिया। अदालत ने इस बर्ताव को गंभीर मानते हुए तमिलनाडु बार काउंसिल से कार्रवाई की सिफारिश की।
बुधवार को फिर होगी सुनवाई

हाई कोर्ट ने कहा कि वह इस पूरे विवाद पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का भी पक्ष सुनना चाहती है। अदालत का कहना है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक तथ्यों के बिना इस विवाद पर स्थायी समाधान निकालना संभव नहीं है। जिस वजह से इस मामले पर आज बुधवार को फिर से सुनवाई होगी।
यह भी पढ़ें: केजरीवाल का बड़ा आरोप… गोवा में कांग्रेस को वोट देने का फायदा नहीं, जीतते ही भाजपा में जाएंगे प्रत्याशी


Download Android App
Download iOS App




