पश्चिम बंगाल भाजपा नेतृत्व ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ की सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ को देने पर आपत्तियों को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर बुधवार को निशाना साधा। उसने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उन्हें पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के लिए इच्छुक नहीं है।
गृह मंत्रालय ने पिछले सप्ताह एक आदेश जारी कर सीआरपीएफ को धनखड़ की सुरक्षा का जिम्मा संभालने के निर्देश दिए जो देश के सभी हिस्सों में वैध होगा। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने 21 अक्टूबर को गृह मंत्रालय को लिखे पत्र में पूछा कि राज्यपाल की सुरक्षा सीआरपीएफ को सौंपने का फैसला लिए जाने से पहले उससे राय क्यों नहीं ली गई।
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि जिस तरीके से धनखड़ और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो से पिछले महीने यादवपुर विश्वविद्यालय में दुर्व्यवहार किया गया वह दिखाता है कि राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गयी है। घोष ने कहा, ‘‘ममता बनर्जी सरकार सीआरपीएफ को राज्यपाल की सुरक्षा सौंपने का विरोध कर रही है। लेकिन उन्हें खुद रेल मंत्री रहते हुए रेलवे की तरफ से सुरक्षा मिली थी। बाद में जब वह मुख्यमंत्री बनी तो आरपीएफ के कुछ जवान तब भी उनकी सुरक्षा में तैनात थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर राज्य सरकार को इससे कोई दिक्कत नहीं है तो अब क्या कठिनाई है कि यदि केंद्र सरकार राज्यपाल को सुरक्षा मुहैया कराती है।’’ राज्यपाल कार्यालय में सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार को एक पत्र भेजकर राज्यपाल की सुरक्षा को जेड से जेड प्लस श्रेणी में करने के लिए कहा गया है।


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