सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 2002 में बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले में एक निचली अदालत और बंबई उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी करने के लिए गुजरात सरकार को दो हफ्तों का समय दिया है।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने गुजरात सरकार को उसके द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में न्यायालय को सूचित करने के लिए कहा और मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को मुकर्रर कर दी।
अदालत ने कहा कि वह बिलकिस बानो की अनुकरणीय मुआवजा की याचिका पर भी सुनवाई करेगी, क्योंकि उसने गुजरात सरकार की पांच लाख रुपये की अंतरिम मुआवजा राशि को ठुकरा दिया था। शीर्ष अदालत ने इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार से दोषी ठहराए गए पुलिस के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर जवाब मांगा था।


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