बीमारी से जूझते हुए लिखी परीक्षा, लेकिन परिणाम से पहले हार गई जिंदगी की जंग, राजस्थान में निकिता को मिले 93 फीसदी अंक

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Rajasthan 12th Board Exam Result 2026: राजस्थान में 12वीं बोर्ड का रिजल्ट आज यानी मंगलवार को जारी हुआ। जहां एक तरफ कई घरों में खुशियां मनाई जा रही थीं, तो वहीं श्रीगंगानगर जिले के रावला गांव में माहौल बिल्कुल उल्टा था। यहां रहने वाली छात्रा निकिता ने 93.80% अंक हासिल किए, लेकिन वह इस खुशी को देखने के लिए अब इस दुनिया में नहीं रही। निकिता ने बोर्ड परीक्षा के दौरान ही तेज बुखार के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपने सभी पेपर दिए। वह पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थी और हर हाल में परीक्षा देना चाहती थी। लेकिन…

Rajasthan 12th Board Exam Result 2026: राजस्थान में 12वीं बोर्ड का रिजल्ट आज यानी मंगलवार को जारी हुआ। जहां एक तरफ कई घरों में खुशियां मनाई जा रही थीं, तो वहीं श्रीगंगानगर जिले के रावला गांव में माहौल बिल्कुल उल्टा था। यहां रहने वाली छात्रा निकिता ने 93.80% अंक हासिल किए, लेकिन वह इस खुशी को देखने के लिए अब इस दुनिया में नहीं रही।

निकिता ने बोर्ड परीक्षा के दौरान ही तेज बुखार के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपने सभी पेपर दिए। वह पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थी और हर हाल में परीक्षा देना चाहती थी। लेकिन परीक्षा खत्म होने के कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई।

Rajasthan 12th Board Exam Result 2026: इलाज के दौरान हुई मौत

निकिता के परिवार ने बताया कि परीक्षा के बाद उसकी हालत लगातार खराब होती गई। पहले उसे स्थानीय स्तर पर इलाज दिलाया गया, लेकिन सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उसे बीकानेर रेफर कर दिया। वहां जांच में पता चला कि वह पीलिया और डायबिटीज जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी।

इलाज के दौरान ही निकिता ने दम तोड़ दिया। यह घटना उसके रिजल्ट आने से करीब 20 दिन पहले हुई थी। परिवार को उम्मीद थी कि उनकी बेटी जल्द ठीक हो जाएगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

रिजल्ट के दिन घर में छाया मातम

जब मंगलवार को रिजल्ट घोषित हुआ और निकिता के 93.80% अंक सामने आए, तो यह खबर परिवार के लिए खुशी और दुख दोनों लेकर आई। जहां इतनी अच्छी सफलता पर गर्व होना चाहिए था, वहीं बेटी के न होने का दर्द परिवार को अंदर तक तोड़ गया। गांव और आसपास के लोग भी इस खबर से भावुक हो गए। हर कोई निकिता की मेहनत और लगन की तारीफ कर रहा है।

पढ़ाई में तेज और सपने थे बड़े

निकिता श्रीगंगानगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, रावला में पढ़ती थी और कला वर्ग की छात्रा थी। वह पढ़ाई में शुरू से ही होनहार थी और अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देखती थी। उसका सपना था कि वह आगे चलकर कलेक्टर बने और अपने परिवार का नाम रोशन करे। लेकिन उसकी यह ख्वाहिश अधूरी रह गई।

परिवार की स्थिति और जिम्मेदारियां

निकिता के पिता मंगल सिंह और मां चरणजीत कौर मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके लिए बेटी की पढ़ाई ही सबसे बड़ी उम्मीद थी। निकिता के अलावा परिवार में दो बहनें और एक छोटा भाई है। बड़ी बहन बीएसटीसी की पढ़ाई कर रही है, जबकि छोटी बहन ने 10वीं पास की है और भाई ने हाल ही में 8वीं कक्षा पूरी की है।

हिम्मत और मेहनत की मिसाल बनी निकिता

निकिता की कहानी हर किसी को यह सिखाती है कि मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। तेज बुखार में भी परीक्षा देना और इतना अच्छा परिणाम हासिल करना उसकी मेहनत और लगन को दर्शाता है। हालांकि वह आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी सफलता और संघर्ष हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।