Rajasthan Civic Elections 2026: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। इस बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने चुनावी गठबंधन करके इस हलचल को और बढ़ा दिया है। वहीं दोनों दलों के नेताओं ने जयपुर में एक साथ चुनाव प्रचार कर इसकी शुरुआत भी कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ओवैसी और बेनीवाल ने जयपुर की भट्टा बस्ती के वार्ड नंबर 146 में संयुक्त रूप से चुनावी सभा की। यहां दोनों नेताओं ने AIMIM की उम्मीदवार फिरोज बानो के समर्थन में लोगों से वोट मांगा। मंच से दोनों नेताओं ने साफ संकेत दिया कि यह गठबंधन केवल निकाय चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा,
बीजेपी-कांग्रेस के सामने तीसरा विकल्प
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि राजस्थान की राजनीति लंबे समय से बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही घूमती रही है। ऐसे में उनकी कोशिश राज्य में एक मजबूत तीसरा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की है। ओवैसी ने कहा कि कई बार छोटी पार्टियों और उनके नेताओं का इस्तेमाल दोनों बड़ी पार्टियों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए किया है। अब जरूरत ऐसी राजनीति की है, जिसमें जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव से शुरू हुआ AIMIM और RLP का साथ आगे भी जारी रह सकता है। ओवैसी के मुताबिक, आने वाले विधानसभा चुनाव में भी दोनों दल साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने की संभावना पर काम करेंगे।
बेनीवाल ने उठाया जाट-मुस्लिम एकता का मुद्दा
ओवैसी ने अपने संबोधन में राजस्थान के साथ उत्तर प्रदेश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों दल मिलकर उन ताकतों के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे, जिनसे उन्हें वैचारिक तौर पर आपत्ति है। इस बयान से संकेत मिल रहा है कि AIMIM और RLP का यह तालमेल केवल स्थानीय चुनावों की रणनीति नहीं हो सकता। अगर गठबंधन आगे बढ़ता है तो इसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।
वहीं RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने भी गठबंधन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जयपुर से राजस्थान की राजनीति में एक नई शुरुआत हो रही है। बेनीवाल ने जाट और मुस्लिम समुदाय के बीच राजनीतिक एकजुटता को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जाट और मुस्लिम समाज पहले भी कई मुद्दों पर साथ रहा है और भविष्य में भी यह साथ जारी रहना चाहिए। उनके मुताबिक, AIMIM और RLP का गठबंधन केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं है, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष करने के लिए भी है।
स्थानीय चुनाव से बड़े सियासी संदेश
राजस्थान के नगर निकाय चुनाव को प्रदेश की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है। ऐसे में AIMIM और RLP का एक साथ आना बीजेपी और कांग्रेस के लिए नई चुनौती बन सकता है।
लेकिन , इस गठबंधन का चुनावी असर कितना होगा, यह नतीजे आने के बाद ही साफ होगा। फिलहाल दोनों दलों ने मिलकर तीसरा विकल्प पेश करने की कोशिश शुरू कर दी है।
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