Rajasthan Seats Increase: केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण यानी नारी वंदन अधिनियम वर्ष 2029 से पहले लागू कर सकती है। इसके तहत लोकसभा की सीटें भी बढ़ाई जाएंगी, जिसके लिए परिसीमन होगा। इसी कड़ी में राजस्थान में भी लोकसभा सीटें बढ़ाई जाएंगी। राज्य में फिलहाल 25 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं। अगर परिसीमन होता है, तो 13 सीटों की बढ़ोतरी के साथ राजस्थान में 38 सीटें हो सकती हैं। देश में सन् 1951 में हुए पहले चुनाव के समय राजस्थान में 18 लोकसभा सीटें थीं। इसमें 16 सीटों पर 1 और 2 सीटों पर 2-2 सांसद चुने जाते थे।
Rajasthan Seats Increase: 1951 के वक्त कौन-कौन सी सीटें थी?

1951 में हुए पहले चुनाव के समय राजस्थान में 18 लोकसभा सीटें थी। इसमें जयपुर, भरतपुर, अलवर, गंगानगर, बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर, सिरोही, नागौर (पाली), सीकर, जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, उदयपुर, बांसवाड़ा (डूंगरपुर), चित्तौड़गढ़, कोटा (बूंदी) और कोटा (झालावाड़) शामिल है।
1973 के परिसीमन में कितनी सीटें बढ़ी?
1973 में परिसीमन आयोग के प्रस्तावों के राजस्थान में कुल 25 सीटें हुईं। इनमें गंगानगर, बीकानेर, चुरु, झूंझनू, सीकर, जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, बयाना, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, कोटा, झालावाड़, बांसवाड़ा, सलुंबर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, पाली, जालौर, बाड़मेर, जोधपुर और नागौर शामिल हैं।
Rajasthan Seats Increase: हाल में 25 लोकसभा सीटें

2024 में हुए चुनावों में राजस्थान में 25 लोकसभा सीटें थीं। इनमें गंगानगर (एससी), बीकानेर (एससी), चुरू, झुंझुनू, सीकर, जयपुर ग्रामीण, जयपुर, अलवर, भरतपुर (एससी), करौली-धोलपुर (एससी), दौसा (एसटी), टोंक-सवाई माधोपुर, अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर, उदयपुर (एसटी), बांसवाड़ा (एसटी), चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा और झालावाड़-बारन शामिल हैं। इनमें से कुछ सीटें अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं।
क्या है सीटों का गणित?
आपको बता दें कि वर्ष 2002 में भारत ने परिसीमन आयोग प्रक्रिया शुरू की और 2008 में नई सीमाएं लागू कीं, लेकिन सीटों की कुल संख्या में बदलाव नहीं किया गया। वर्तमान में राजस्थान की 25 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से 4 सीटें अनुसूचित जाति और 3 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
अगर परिसीमन हो और सीटों बढ़ी, तो राजस्थान में आरक्षित सीटों की संख्या 7 से बढ़कर करीब 10 या 11 तक पहुंच सकती है। इसमें अनुसूचित जाति (SC) के लिए लगभग 6 सीटें, अनुसूचित जनजाति (ST) के लगभग 4 से 5 सीटें और सामान्य सीटें लगभग 27 से 28 सीटें हो सकतीं हैं।
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