नई दिल्ली : लोढ़ा समिति के मूल सुधारों में तीन साल के एक कार्यकाल के बाद बाहर रहने की अनिवार्यता का प्रावधान था लेकिन इस आदेश के बाद पदाधिकारी अब लगातार दो कार्यकाल के बाद एक निश्चित समय के लिये कोई पद नहीं संभाल पाएंगे। नये फैसले का मतलब है कि वर्तमान कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और कार्यवाहक कोषाध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी एक अन्य कार्यकाल के लिये चुनाव लड़ सकते हैं। प्रशासकों की समिति के प्रमुख विनोद राय ने कहा कि यह माननीय न्यायालय का उत्कृष्ट आदेश है। मुझे पदाधिकारियों के लगातार दो कार्यकाल पर कोई समस्या नहीं है।
यहां तक कि मैं भी पहले चाहता था कि छह साल के कार्यकाल के बाद ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ शुरू हो लेकिन तब मुझे आम सहमति नहीं मिली थी। राय ने कहा कि आज के फैसले का दूसरा सकारात्मक पहलू शीर्ष अदालत द्वारा बीसीसीआई संविधान को स्वीकार करने के लिये समयसीमा तय करना है जिससे बोर्ड के चुनावों के लिये भी रास्ता साफ होगा लेकिन इसके लिये राज्य संघों को इसका शत-प्रतिशत पालन करना पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय ने राज्य संघों को बीसीसीआई का संविधान अपनाने या फिर उसका पालन नहीं करने पर कार्रवाई का सामना करने के लिये तैयार रहने की चेतावनी दी। राय ने कहा कि अब आखिर में हमारे पास एक खाका है जो नये संविधान को अपनाने के लिये मार्ग प्रशस्त करेगा और फिर उसके बाद चुनाव होंगे।
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अब इसके लिये समयसीमा तय हो गयी है। उन्होंने इस पर खुशी जतायी कि सभी मूल सदस्यों के मतदान अधिकार बरकरार रखे गये हैं। राय ने कहा कि हम पहले भी कह चुके थे कि मुंबई जैसी इकाईयों के मतदान अधिकार बनाये रखे जाने चाहिए। मसौदा संविधान में भी इसका जिक्र है। प्रत्येक सदस्य इकाई के पास मतदान का अधिकार होना चाहिए। सीओए की एक अन्य सदस्य डायना एडुल्जी ने भी नये आदेश का स्वागत किया। एडुल्जी ने कहा कि हम फैसले से खुश हैं। हमें उच्चतम न्यायालय ने सुधारों पर निगरानी रखने के लिये नियुक्त किया था। अब न्यायालय ने अपने आदेश में संशोधन किया है और हमें यह देखना होगा कि इसे सही तरह से लागू किया जाए। मुझे उम्मीद है कि हर कोई इसका पालन करेगा और क्रिकेट आगे बढ़ेगा।


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