युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही अपने प्रदर्शन से इंडियन क्रिकेट में अपनी जगह बना ली है। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने उनके भविष्य को लेकर बड़ी बात कही है। कैफ के मुताबिक सूर्यवंशी की मौजूदा फॉर्म और एबिलिटी को देखते हुए उन्हें लंबे समय तक प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना टीम मैनेजमेंट के लिए आसान नहीं होगा।
कैफ का मानना है कि टीम को ऐसा बैलेंस तैयार करना चाहिए, जिसमें वैभव सूर्यवंशी के साथ संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को भी एक ही प्लेइंग इलेवन में उतारा जा सके। इसके लिए जरूरत पड़ने पर टीम कॉम्बिनेशन में बदलाव करते हुए तिलक वर्मा या शिवम दुबे में से किसी एक को बाहर किया जा सकता है।
Mohammad Kaif On Vaibhav Sooryavanshi: सूर्यवंशी के लिए जगह तलाशने की जरूरत

एशियन गेम्स के लिए इंडियन टीम के पॉसीबल कॉम्बिनेशन पर चर्चा करते हुए मोहम्मद कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर सूर्यवंशी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चर्चा इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि सूर्यवंशी को टीम में जगह मिलेगी या नहीं, बल्कि इस पर होनी चाहिए कि उन्हें प्लेइंग इलेवन में किस तरह शामिल किया जाए।
कैफ के मुताबिक सूर्यवंशी ने अपने प्रदर्शन से खुद को साबित किया है और उन्हें टीम में शामिल करने से इंडियन बल्लेबाजी को फायदा मिल सकता है। उन्होंने यह भी पॉसीबिलिटी जताई कि अगले छह महीनों में ऐसा इंडियन प्लेइंग इलेवन देखने को मिल सकता है, जिसमें सूर्यवंशी, संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा तीनों साथ खेलें।
तिलक या दुबे में से किसी एक की जगह बन सकती है

सूर्यवंशी को आखरी प्लेइंग 11 में शामिल करने के लिए टीम मैनेजमेंट को कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं। कैफ ने तिलक वर्मा और शिवम दुबे के ऑप्शन पर विचार करने की बात कही है। तिलक वर्मा टीम के वाइस-कप्तान हैं, लेकिन कैफ के मुताबिक उप-कप्तान होने से किसी खिलाड़ी की प्लेइंग इलेवन में जगह परमानेंट नहीं हो जाती। अगर टीम के बैलेंस के लिए जरूरी हो तो वाइस-कप्तान को भी बाहर बैठाया जा सकता है।
दूसरी ओर, शिवम दुबे को लेकर कैफ ने कहा कि मौजूदा समय में उनका इस्तेमाल खास तौर से बल्लेबाजी के लिए किया जा रहा है। उन्हें नियमित रूप से गेंदबाजी का ज्यादा मौका नहीं मिल रहा है। साथ ही फील्डिंग को भी उनकी सबसे बड़ी ताकत नहीं माना जाता। ऐसे में टीम कॉम्बिनेशन तय करते समय दुबे की पोजीशन पर भी विचार किया जा सकता है।
सचिन-सहवाग-गांगुली का एक्ज़ाम्पल दिया

मोहम्मद कैफ ने अपनी बात को समझाने के लिए भारतीय क्रिकेट के पुराने दौर का एक्ज़ाम्पल दिया। सौरव गांगुली की कप्तानी के समय भारतीय टीम के पास सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गांगुली के रूप में तीन ऐसे बल्लेबाज थे, जो ओपनिंग कर सकते थे। इसके बावजूद टीम ने किसी एक खिलाड़ी को बाहर करने के बजाय तीनों को प्लेइंग इलेवन में फिट करने का तरीका खोजा। जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किया गया। सचिन तेंदुलकर ने कई मौकों पर नंबर चार पर भी बल्लेबाजी की।
साल 2003 के वर्ल्ड कप के शुरुआत में सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली ने पारी का आगाज किया था, जबकि वीरेंद्र सहवाग नंबर तीन पर उतरे। बाद में बल्लेबाजी क्रम में बदलाव हुआ और सचिन-सहवाग की जोड़ी ओपनिंग करने लगी, जबकि गांगुली नंबर तीन पर आए। कैफ के मुताबिक उस समय टीम मैनेजमेंट ने यह नहीं माना कि तीन ओपनर होने की वजह से किसी एक को बाहर करना जरूरी है। इसके बजाय सभी के रोल में बदलाव करके उनकी एबिलिटी का इस्तेमाल किया गया। उनका मानना है कि सूर्यवंशी को लेकर भी इसी तरह का समाधान निकाला जा सकता है।
आईपीएल और जिम्बाब्वे सीरीज में दिखा चुके हैं दम

मोहम्मद कैफ ने वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि यह युवा बल्लेबाज बड़े मंच पर अपनी एबिलिटी साबित कर चुके हैं। आईपीएल में सूर्यवंशी ने अपनी अटैकिंग बल्लेबाजी से हर किसी को प्रभावित किया है और दबाव के मुकाबलों में भी रन बनाए हैं। इसके अलावा जिम्बाब्वे के खिलाफ हालिया टी-20 सीरीज में भी सूर्यवंशी का प्रदर्शन शानदार रहा था। इस सीरीज में उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
कैफ के मुताबिक अब सूर्यवंशी को यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि वह इस लेवल पर खेलने की एबिलिटी रखते हैं या नहीं। उनके प्रदर्शन ने प्लेइंग इलेवन में जगह के लिए उनका दावा मजबूत कर दिया है। अब यहां पर ये देखना होगा कि टीम मैनेजमेंट सूर्यवंशी को किस तरह प्लेइंग 11 में फिट करती है। कैफ की राय के मुताबिक टीम के सामने चुनौती सूर्यवंशी के लिए जगह ढूंढने की नहीं, बल्कि ऐसा कॉम्बिनेशन तैयार करने की है जिसमें उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का पूरा फायदा उठाया जा सके।


Download Android App
Download iOS App




