इंडियन मेन्स और वुमेन्स हॉकी टीमों का वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना टूट गया है। दोनों टीमों के टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद भारतीय हॉकी के पूर्व दिग्गज गोलकीपर और दो बार के ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट पी.आर. श्रीजेश ने टीम मैनेजमेंट और पूरे सिस्टम के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। श्रीजेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट लिखकर भारतीय हॉकी में जवाबदेही की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि बड़े टूर्नामेंट में नाकामी के बाद आखिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी?
PR Sreejesh On Indian Hockey Team: अर्जेंटीना से हारकर सेमीफाइनल से बाहर हुई पुरुष टीम
Don’t worry… the World Cup doesn’t matter. 🤡
The Asian Games are coming. Win a medal 🥇 there, and then we can start dreaming about LA 2028. Apparently, that’s enough to cover everything that went wrong at the World Cup.
Women’s chief coach on holiday just before the World…
— sreejesh p r (@16Sreejesh) August 24, 2026
इंडियन मेन्स हॉकी टीम को सोमवार के दिन एम्स्टेलवीन के वैगनर हॉकी स्टेडियम में अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई। अब इंडियन टीम टूर्नामेंट में सातवें पोजीशन के लिए बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला करेगी। इससे एक दिन पहले भारतीय वुमेन्स टीम भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेलने के बाद सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई थी। दोनों टीमों के निराशाजनक परफॉर्मेंस के बाद श्रीजेश ने हॉकी सिस्टम को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
‘वर्ल्ड कप कोई मायने नहीं रखता?’

श्रीजेश ने अपनी पोस्ट में भारतीय हॉकी की तैयारियों और प्राइयोरिटी पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि मानो वर्ल्ड कप की कोई अहमियत ही नहीं है और अब एशियन गेम्स में मेडल जीतकर लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। उनका इशारा इस बात की ओर था कि बड़े टूर्नामेंट में मिली असफलता को अगले टूर्नामेंट के टारगेट के पीछे छिपा देना सही तरीका नहीं है। उनके मुताबिक वर्ल्ड कप सिर्फ एक और कॉम्पटीशन नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी की असल एबीलिटी को परखने का बड़ा मंच है।
महिला टीम की तैयारियों पर भी सवाल

श्रीजेश ने इंडियन वुमेन्स टीम की तैयारियों को लेकर खास चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से ठीक पहले टीम के चीफ कोच छुट्टी पर कैसे हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने खिलाड़ियों के जज्बे और स्ट्रगल की तारीफ की। उनका कहना था कि मुश्किल सिचुएशन के बावजूद खिलाड़ियों ने पूरी मेहनत की और उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश की। लेकिन इसी के साथ उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि ऐसी सिचुएशन के लिए जवाबदेही आखिर किसकी होनी चाहिए। क्या किसी टीम से टूर्नामेंट के निर्णायक दौर में अपना बेस्ट प्रदर्शन करने की उम्मीद की जा सकती है, जब मेन कोच ही टीम के साथ मौजूद न हो?
मेन्स टीम के प्रदर्शन पर भी साधा निशाना

श्रीजेश ने मेन्स टीम के प्रदर्शन को लेकर भी हॉकी सिस्टम की सोच पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब भारत किसी मजबूत टीम से हारता है, तो उसे अक्सर ‘लर्निंग एक्सपीरियंस’ बता दिया जाता है। वहीं किसी एशियाई टीम के खिलाफ जीत को बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाता है।
उन्होंने पूछा कि आखिर भारतीय हॉकी का लक्ष्य क्या है? क्या टीम केवल अच्छी हॉकी खेलने के लिए तैयार की जा रही है या फिर ऐसी टीम बनाने की कोशिश हो रही है, जो दुनिया की शीर्ष टीमों को लगातार हरा सके? श्रीजेश ने साफ कहा कि ‘लर्निंग’, ‘गुड हॉकी’ और भविष्य के टूर्नामेंट का हवाला देकर मौजूदा नाकामियों से बचने की कोशिश बंद होनी चाहिए। उनके मुताबिक वर्ल्ड कप किसी अभ्यास या रिहर्सल का मंच नहीं है।
‘आखिर जवाबदेही कौन तय करेगा?’

अपनी पोस्ट के अंत में श्रीजेश ने भारतीय हॉकी सिस्टम के सामने सबसे बड़ा सवाल रखा। उन्होंने पूछा कि इन नतीजों के बाद कठिन सवाल कौन पूछेगा और जवाबदेही तय करने की मांग कौन करेगा? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या भारतीय हॉकी सिस्टम को वास्तव में इन नतीजों की परवाह है? गौरतलब है कि श्रीजेश इससे पहले भी भारतीय हॉकी के कोचिंग सिस्टम पर सवाल उठा चुके हैं। जूनियर पुरुष टीम के कोच के तौर पर उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया था। उनके मार्गदर्शन में भारतीय जूनियर पुरुष टीम ने पिछले साल जूनियर वर्ल्ड कप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था, लेकिन इसके बावजूद उनका कार्यकाल रिन्यू नहीं किया गया।
गोल अंतर के कारण महिला टीम का सपना टूटा

भारतीय महिला टीम सेमीफाइनल के बेहद करीब पहुंचकर बाहर हुई। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने दूसरे राउंड के आखिरी मुकाबले में भारत ने गोलरहित ड्रॉ खेला। इस नतीजे के बाद ऑस्ट्रेलिया ने गोल अंतर के आधार पर सेमीफाइनल में जगह बना ली, जबकि भारतीय टीम का सफर यहीं खत्म हो गया।
अब पुरुष और महिला दोनों टीमों के सेमीफाइनल से बाहर होने के बाद भारतीय हॉकी में टीम की तैयारी, कोचिंग और पूरे सिस्टम को लेकर बहस तेज हो गई है। श्रीजेश की बातों से साफ है कि सवाल केवल वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल तक नहीं पहुंचने का नहीं है। असली चुनौती एक ऐसा सिस्टम तैयार करने की है, जो भारतीय टीम को सिर्फ अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम नहीं, बल्कि दुनिया की शीर्ष टीमों को हराने में सक्षम बनाए।0


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