रविवार को प्रीति पाल ने Paralympics में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला ट्रैक और फील्ड एथलीट बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने पेरिस Paralympics में 30.01 सेकंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ 200 मीटर टी35 श्रेणी में कांस्य पदक हासिल किया। यह उल्लेखनीय उपलब्धि उन्हें टोक्यो में निशानेबाज अवनि लेखरा की स्वर्ण और कांस्य उपलब्धियों के बाद एक ही पैरालिंपिक में दो पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनी है।
HIGHLIGHTS
- प्रीति पाल ने पेरिस पैरालंपिक में रचा इतिहास
- 200 मीटर की रेस में प्रीति ने जीता ब्रॉन्ज मेडल
- पेरिस पैरालंपिक में प्रीति का था ये दूसरा मेडल
कौन महिला पैरा धावक प्रीति पाल
22 सितंबर, 2000 को एक किसान परिवार में जन्मी प्रीति को जन्म से ही कई शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जन्म के छह दिन बाद ही उसके शरीर के निचले हिस्से में प्लास्टर चढ़ा दिया गया, जिसके कारण उसके पैर कमजोर हो गए और पैरों की मुद्रा अनियमित हो गई, जिससे उसे कई तरह की बीमारियों का खतरा हो गया। उसने अपने पैरों को मजबूत बनाने के लिए कई पारंपरिक उपचार करवाए। पांच साल की उम्र से प्रीति ने आठ साल तक कैलीपर्स पहने। अपने बचने के बारे में संदेह के बावजूद, उसने जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली स्थितियों पर काबू पाकर अविश्वसनीय ताकत और लचीलापन दिखाया।
प्रीति पाल का सफर चुनौतीपूर्ण रहा
17 साल की उम्र में, सोशल मीडिया पर Paralympics गेम्स देखने के बाद प्रीति का जीवन के प्रति नजरिया बदल गया। एथलीटों से प्रेरित होकर, उसे एहसास हुआ कि वह अपने सपनों को पूरा कर सकती है। उसने एक स्थानीय स्टेडियम में प्रशिक्षण लेना शुरू किया, लेकिन वित्तीय सीमाओं ने परिवहन को मुश्किल बना दिया। उसका जीवन तब बदल गया जब उसकी मुलाकात पैरालंपिक एथलीट फातिमा खातून से हुई, जिन्होंने उसे पैरा-एथलेटिक्स से परिचित कराया। फातिमा की सलाह के तहत, प्रीति ने 2018 राज्य पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लिया और बाद में राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लिया। उनके समर्पण ने उन्हें एशियाई पैरा गेम्स 2022 के लिए अर्हता प्राप्त करने में मदद की, जहाँ वह 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में चौथे स्थान पर रहीं। हालाँकि वह कोई पदक नहीं जीत पाई, लेकिन प्रीति दृढ़ निश्चयी रही और उसने पैरालंपिक खेलों को लक्ष्य बनाया। वह कोच गजेंद्र सिंह से प्रशिक्षण लेने के लिए दिल्ली चली गई, जहाँ उसने अपनी दौड़ने की तकनीकों को निखारने पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे उसके प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ।
प्रीति पाल उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली हैं
प्रीति पाल उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली हैं। मेरठ में उनका गांव कसेरू बक्सर पड़ता है। प्रीति एक सामान्य परिवार से आती हैं। एथलेटिक्स में करियर बनाना उनके लिए बिल्कुल भी आसान हीं रहा। उनके पिता का नाम अनिल कुमार है जो कि दूध की डेयरी चलाते हैं। प्रीति का संघर्ष किसी प्रेरणा से कम नहीं है। प्रीति को बचपन में ही सेरेब्रल पाल्सी का पता चला था। सेरेब्रल पाल्सी एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिमाग और शरीर मांसपेशियों के बीच सही से संवाद नहीं हो पाता है। यही कारण है कि इस बीमारी में व्यक्ति किसी भी चीज पर रिएक्ट करने में अधिक समय लेता है।


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