भारत-ईयू एफटीए से यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के दवा बाजार तक पहुंच के द्वार खुले

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नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारत को यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के दवा और मेडिकल उपकरण बाजार तक पहुंच मिल गई है। सरकार के अनुसार, इससे भारतीय दवा उद्योग को बड़ी ताकत मिलेगी। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते से दवा कंपनियों को अपने कारोबार का विस्तार करने, नई नौकरियां पैदा करने और भारत को दवाओं के भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे भारत की पहचान ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में और मजबूत होगी। मंत्रालय ने कहा…

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारत को यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के दवा और मेडिकल उपकरण बाजार तक पहुंच मिल गई है। सरकार के अनुसार, इससे भारतीय दवा उद्योग को बड़ी ताकत मिलेगी।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते से दवा कंपनियों को अपने कारोबार का विस्तार करने, नई नौकरियां पैदा करने और भारत को दवाओं के भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे भारत की पहचान ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में और मजबूत होगी।

मंत्रालय ने कहा कि इस समझौते से कुशल रोजगार, औद्योगिक नौकरियां, छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की भागीदारी बढ़ेगी और भारत की वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ाव भी मजबूत होगा।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह एफटीए दवा और मेडिकल उपकरण उद्योग के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोलता है।

जेपी नड्डा ने कहा, “यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के फार्मा और मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार तक पहुंच और भारतीय मेडिकल उपकरणों पर कम टैरिफ से इस अहम सेक्टर की तेजी से वृद्धि होगी।”

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वास्थ्य और निर्माण क्षेत्र में एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है।

यह एफटीए भारत की सबसे अहम आर्थिक साझेदारियों में से एक में मील का पत्थर माना जा रहा है।

यह समझौता आधुनिक नियमों पर आधारित व्यापार साझेदारी के रूप में तैयार किया गया है, जो आज की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बाजार को और गहराई से जोड़ता है।

इस समझौते से भारतीय कंपनियों को खास बाजारों में प्राथमिकता से पहुंच मिलेगी। इससे ‘मेड इन इंडिया’ मेडिकल उपकरणों पर टैरिफ कम होगा और रसायन, उर्वरक, दवाएं, कॉस्मेटिक, साबुन और डिटर्जेंट जैसे क्षेत्रों में तेज विकास होगा। साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ाने और एमएसएमई क्लस्टर विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

यह समझौता गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मौजूद औद्योगिक केंद्रों को भी आगे बढ़ने का मौका देगा। समुद्री तटीय निर्यात केंद्र निर्यात आधारित विकास को बढ़ावा देंगे, जिससे रोजगार और प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों को फायदा होगा।

मंत्रालय ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए साझा मूल्यों को मजबूत करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है और भारत व यूरोप दोनों के लिए समावेशी, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार विकास की नींव रखता है।

–आईएएनएस

डीबीपी/एएस

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