‘भगवान राम का नाम नहीं, तो क्या ‘ला इलाही अल्लाह’ का नाम योजनाओं में होगा? भाभी डिंपल यादव पर भड़की अपर्णा यादव

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Aparna Yadav On Dimple Yadav: भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव ने समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव द्वारा ‘जी राम जी’ बिल पर उठाए गए सवालों का करारा जवाब दिया है। अपर्णा का बयान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है और उन्होंने सपा सांसद के आरोपों को सीधे चुनौती दी है। जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज है। Dimple Yadav का नाम सुनते ही भड़क उठी अपर्णा! अपर्णा यादव ने कहा, “अगर भारत में भगवान राम के नाम को नहीं लिया जाएगा, तो क्या योजनाओं में ‘ला इलाही अल्लाह’ का…

Aparna Yadav On Dimple Yadav: भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव ने समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव द्वारा ‘जी राम जी’ बिल पर उठाए गए सवालों का करारा जवाब दिया है। अपर्णा का बयान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है और उन्होंने सपा सांसद के आरोपों को सीधे चुनौती दी है। जिसको लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज है।

Dimple Yadav का नाम सुनते ही भड़क उठी अपर्णा!

अपर्णा यादव ने कहा, “अगर भारत में भगवान राम के नाम को नहीं लिया जाएगा, तो क्या योजनाओं में ‘ला इलाही अल्लाह’ का इस्तेमाल किया जाएगा?” उनके इस बयान से राष्ट्रीय राजनीति और सांस्कृतिक पहचान को लेकर बहस और भी तीव्र हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में भगवान राम का नाम जुड़ा होना गर्व की बात है और इसे नकारना देश की मूल पहचान के खिलाफ होगा।

G Ram G bill पर सियासी हलचल तेज (Aparna Yadav On Dimple Yadav)

Aparna Yadav
Aparna Yadav

बता दें कि यह बयान केंद्रीय सरकार के ‘जी राम जी’ बिल के खिलाफ विपक्ष की आलोचनाओं के बीच आया है। सपा सांसद डिंपल यादव ने संसद परिसर में कहा था कि यह बिल भाजपा द्वारा सत्ता बनाए रखने के लिए भगवान राम के नाम का राजनीतिक उपयोग है और इससे देश के लोगों को “राम भरोसे” छोड़ दिया जाएगा।

उन्होंने इसे महात्मा गांधी के नाम और योजना के मूल उद्देश्य के अपमान जैसा बताया था। अपर्णा यादव का तर्क है कि भारत का सांस्कृतिक धरोहर भगवान राम से जुड़ा है और देश में रामनाम का उल्लेख संविधान और सामाजिक मूल्यों का हिस्सा है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि सपा कुछ बयानबाजी राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है, जबकि जनता ‘राम’ जैसे सकारात्मक प्रतीकों को अपनाने को तैयार है।

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UP Elections
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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान आगामी सर्वदलीय उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की सांस्कृतिक एजेंडा रणनीति का हिस्सा हो सकता है। राम के नाम पर आधारित बिल और बयानबाजी दोनों ही राजनीतिक दलों के लिए वोट-बैंक संवेदनशील मुद्दे के रूप में उभर रहे हैं। विपक्षी पार्टी सपा ने केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाया है कि वह महात्मा गांधी और मूल सामाजिक योजनाओं को पीछे रखकर सांप्रदायिकता की राजनीति कर रही है।

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।